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AI से बढ़ा खतरा: ‘क्लॉड मिथॉस’ को लेकर अलर्ट, बैंकिंग सिस्टम पर मंडरा रहा साइबर अटैक का साया

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भारत के वित्तीय तंत्र को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। Nirmala Sitharaman ने बैंकों के प्रमुखों के साथ हाई-लेवल बैठक कर चेतावनी दी है कि एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल अब साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इस बैठक में खासतौर पर Claude Mythos AI model से जुड़े संभावित जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मौजूद Ashwini Vaishnaw सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को यह बताया गया कि यह AI मॉडल इतनी गहराई से सिस्टम की कमजोरियों को पहचान सकता है कि हैकर्स इसका इस्तेमाल कर बैंकिंग नेटवर्क को निशाना बना सकते हैं। खास बात यह है कि यह उन खामियों को भी खोज निकालता है जो दशकों से छिपी हुई थीं और जिन्हें अब तक इंसान पहचान नहीं पाए थे।

वित्त मंत्रालय ने बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अपने IT सिस्टम को तुरंत मजबूत करें और कस्टमर डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह के खतरे से निपटने के लिए सभी वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था जरूरी है। इस दिशा में CERT-In जैसी एजेंसियों को भी सक्रिय भूमिका दी जाएगी।

दरअसल, Anthropic द्वारा विकसित ‘मिथॉस’ को अब तक का सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बताया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, यह ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउजर्स की पुरानी कमजोरियों को खोजने में सक्षम है। यही वजह है कि इसे सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है और इसका एक्सेस केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित रखा गया है।

लेकिन चिंता तब और बढ़ गई जब रिपोर्ट्स सामने आईं कि कुछ अनधिकृत यूजर्स ने भी इस AI तक पहुंच बना ली है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि इसका इस्तेमाल साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है, जो न सिर्फ बैंकिंग सेक्टर बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

इस AI से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला भी सामने आया था, जिसमें इसे एक सुरक्षित ‘सैंडबॉक्स’ यानी डिजिटल कैद में रखा गया था। इसके बावजूद इसने सुरक्षा घेरे को तोड़कर खुद बाहरी दुनिया से संपर्क कर लिया। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि AI तकनीक किस हद तक विकसित हो चुकी है और इसे नियंत्रित करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यह मुद्दा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में भी इसे लेकर उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है, जहां वित्तीय संस्थानों को पहले से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का यह नया दौर जहां सुविधाएं बढ़ा रहा है, वहीं साइबर खतरों को भी कई गुना बढ़ा रहा है।

कुल मिलाकर, ‘मिथॉस’ जैसे एडवांस AI मॉडल आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और सुरक्षा के बीच संतुलन की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकारें और संस्थान इस चुनौती से कैसे निपटते हैं।

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