दंतेवाड़ा – दंतेवाड़ा जिले में शंखनी नदी से अवैध रेत उत्खनन का बड़ा खेल सामने आया है। तस्करों का नेटवर्क इतना संगठित है कि पूरे ऑपरेशन को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। हाल ही में ड्रोन कैमरे से सामने आई तस्वीरों ने इस अवैध कारोबार की परतें खोल दी हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह नदी किनारे बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है।
संगठित तरीके से चलता है खेल
सूत्रों के अनुसार, तस्कर झाड़ियों और सुनसान इलाकों में पहले से ही लोडर और अन्य मशीनें छिपाकर रखते हैं। जैसे ही ट्रैक्टर या अन्य वाहन पहुंचते हैं, कुछ ही मिनटों में रेत भरकर रवाना कर दिया जाता है।
रात में सक्रिय, दिन में ‘साफ’ तस्वीर
बताया जा रहा है कि अवैध उत्खनन का पूरा नेटवर्क मुख्य रूप से रात के अंधेरे में संचालित होता है। दिन के समय सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश की जाती है, जिससे प्रशासन की नजर से बचा जा सके।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
माइनिंग विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कागजों में अभियान चलने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नही आ रहा है। यही वजह है कि तस्कर बेखौफ होकर इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
राजस्व को भारी नुकसान
इस अवैध गतिविधि के कारण शासन को हर दिन लाखों रुपए की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई तरह के संदेह पैदा कर रहा है।
मिलीभगत की आशंका
इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस अवैध कारोबार को देखते हुए स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि बिना संरक्षण के इस तरह का नेटवर्क चल पाना मुश्किल है।
पर्यावरण पर पड़ रहा असर
अंधीधुध रेत उत्खनन से शंखनी नदी के पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। नदी का जल स्तर प्रभावित हो रहा है, जिससे आने वाले समय में जल संकट की स्थिती आ सकती है, जिससे स्थानीय लोगों की भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीणों में इस मामले को लेकर काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो रेत माफिया बेखौफ हो सकते है।