भारतीय शेयर बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां इन्फोसिस को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। कंपनी के मार्केट कैप में करीब 2 लाख करोड़ रुपए की गिरावट के बाद वह देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची से बाहर हो गई है। इस बदलाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और आईटी सेक्टर की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल के महीनों में इन्फोसिस के शेयरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। तिमाही नतीजों के बाद भी बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी और एक ही दिन में शेयर करीब 7% तक टूट गए। साल 2026 में अब तक कंपनी के शेयरों में लगभग 30% की गिरावट आ चुकी है, जिससे इसका मार्केट कैप घटकर करीब 4.9 लाख करोड़ रुपए रह गया है।
इस गिरावट के साथ ही टॉप कंपनियों की सूची में नया बदलाव देखने को मिला है। एलआईसी ने करीब 5.1 लाख करोड़ रुपए के मूल्य के साथ टॉप-10 में अपनी जगह बना ली है। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी पहले की तुलना में नीचे खिसक गई है, जिससे साफ है कि पूरे आईटी सेक्टर पर दबाव बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि इन्फोसिस के हालिया नतीजे पूरी तरह कमजोर नहीं थे। मार्च तिमाही में कंपनी ने 46,402 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और 8,501 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो उम्मीद से बेहतर था। लेकिन असली चिंता कंपनी की भविष्य की ग्रोथ गाइडेंस को लेकर सामने आई। FY27 के लिए कंपनी ने केवल 1.5% से 3.5% ग्रोथ का अनुमान दिया है, जो निवेशकों को निराश कर गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर में बदलाव का संकेत है। क्लाइंट अब खर्च कम कर रहे हैं और कंपनियां ऑटोमेशन व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। इन्फोसिस भी अपने AI प्लेटफॉर्म Topaz के जरिए नई दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां हजारों डेवलपर्स AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।
हालांकि, AI जहां भविष्य के अवसर खोल रहा है, वहीं पारंपरिक आईटी सेवाओं पर दबाव भी बढ़ा रहा है। यही कारण है कि निवेशक अब इस सेक्टर को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं और अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इन्फोसिस की यह गिरावट बाजार में बदलते ट्रेंड और नई टेक्नोलॉजी के असर का साफ संकेत है—जहां पुरानी ताकतें चुनौती का सामना कर रही हैं और नए खिलाड़ी आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।