सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधन विकास केन्द्र के असेंबली हॉल में 27 अप्रैल 2026 को सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के तत्वावधान में विभागीय सुरक्षा अधिकारियों के लिए एक दिवसीय गहन सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कार्यपालक निदेशक (एसएसओ) श्री के. रामकृष्ण एवं कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (सेफ्टी एवं फायर सर्विसेज- जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड, डोलवी, सालव एवं अंजार वर्क्स) श्री राजेन्द्र कुमार सिंह मुख्य वक्ता एवं संकाय सदस्य के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने दीर्घ औद्योगिक अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सर्विसेज) श्री तुषार कांत, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू) श्री बी. के. बेहेरा सहित विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, विभागीय सुरक्षा अधिकारी, अतिरिक्त सुरक्षा अधिकारी एवं सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन मुख्य महाप्रबंधक (सेफ्टी एवं फायर सर्विसेज) श्री डी. सत्पथी एवं महाप्रबंधक प्रभारी (सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग) श्री एस. के. अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया, जबकि सहायक महाप्रबंधक (सेफ्टी इंजीनियरिंग) श्री शोवन घोष एवं श्री अजय टल्लू कार्यक्रम समन्वयक रहे।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन मुख्य महाप्रबंधक (सेफ्टी एवं फायर सर्विसेज) श्री डी. सत्पथी ने किया, जिसमें उन्होंने विभागीय सुरक्षा अधिकारियों को कार्यस्थल का “पहला सुरक्षा प्रहरी” बताते हुए अनुपालन आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सुरक्षा को एक आंतरिक मूल्य के रूप में अपनाने को कहा।
मुख्य वक्ता श्री राजेंद्र कुमार सिंह ने अपने व्याख्यान में तीन दशकों से अधिक के औद्योगिक अनुभव साझा करते हुए सुरक्षा पेशेवरों को कार्यस्थल पर सक्रिय उपस्थिति एवं श्रमिकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रभाव अधिकार से नहीं, बल्कि सहभागिता से आता है। उन्होंने सुरक्षा संस्कृति के विकास को “भय से आदत और आदत से आंतरिक संस्कृति” तक की यात्रा के रूप में परिभाषित किया तथा असुरक्षित कार्य को रोकने हेतु टीमों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यपालक निदेशक (एसएसओ) श्री के. रामकृष्ण ने अपने संबोधन में संचालन प्रक्रियाओं के निर्धारित क्रम एवं सीमाओं के कठोर अनुपालन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संयंत्र में उपलब्ध मूल संचालन पुस्तिकाओं के पुनः उपयोग एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करते हुए सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
वहीँ कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार ने 360-डिग्री निरीक्षण की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शून्य दुर्घटना का दावा तभी सार्थक है जब संभावित खतरों की पहचान भी सुनिश्चित हो। उन्होंने उपकरणों के स्वास्थ्य के साथ समझौता न करने तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) एवं हीरा (HIRA) की नियमित समीक्षा को प्रक्रिया सुरक्षा की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन महाप्रबंधक (एसएसओ) श्री सुरेश सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। दिनभर चले इस कार्यशाला में कार्यस्थल सुरक्षा से संबंधित विधिक प्रावधान, सुरक्षा नीति एवं योजना, जोखिम पहचान एवं विश्लेषण, व्यवहार-आधारित सुरक्षा, श्रेष्ठ सुरक्षा प्रथाएँ तथा सुरक्षा पेशेवरों की बदलती भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रत्येक सत्र को व्यावहारिक उदाहरणों एवं केस स्टडी के माध्यम से समृद्ध किया गया, जिससे प्रतिभागियों को गहन एवं उपयोगी ज्ञान प्राप्त हुआ।