छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को अब नए स्वरूप और अधिक अधिकारों के साथ “छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल” के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। विधानसभा से पारित संशोधन विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह बदलाव अब लागू हो चुका है, जिससे मंडल की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और प्रभावशाली हो गई है।
अब यह मंडल सिर्फ आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों, पुलों, हवाई अड्डों, सीवरेज सिस्टम और शहर स्तर की जल आपूर्ति जैसी बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं की योजना बनाकर उन्हें जमीन पर उतारने का काम भी करेगा। यानी राज्य में विकास की गति को तेज करने के लिए इसे एक प्रमुख एजेंसी के रूप में तैयार किया गया है।
इस बदलाव के साथ मंडल को तकनीकी और वित्तीय सलाह देने की भी जिम्मेदारी दी गई है। अब यह नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों के साथ-साथ विभिन्न नगर विकास प्राधिकरणों को उनकी क्षमता बढ़ाने में मार्गदर्शन देगा। अधिनियम में जोड़े गए प्रावधानों के तहत मंडल मास्टर प्लान लागू करने, टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS) तैयार करने और स्लम पुनर्विकास जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को भी अंजाम दे सकेगा।
सरकार ने मंडल को पुराने और जर्जर हो चुके आवासीय इलाकों के पुनर्विकास की जिम्मेदारी भी सौंपी है। इसके साथ ही पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने का रास्ता भी खोल दिया गया है, जिससे निजी निवेश के जरिए विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।
इसी के साथ सरकार ने “छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) अधिनियम, 2026” को भी लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब राज्य सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह किसी विशेष क्षेत्र के लिए मौजूदा विकास प्राधिकरणों के अलावा अन्य निकायों को भी ‘प्राधिकरण’ घोषित कर सके। इसमें राज्य की एजेंसियां, सरकारी कंपनियां और नगरीय निकाय शामिल हो सकते हैं।
इन नामित निकायों को वही अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जो किसी विकास प्राधिकरण के पास होती हैं—जैसे शहरी विकास योजनाओं का निर्माण, उनका क्रियान्वयन और निगरानी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में टाउन प्लानिंग अधिक व्यवस्थित होगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला छत्तीसगढ़ के शहरी और बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अब सरकार अपने विशेषज्ञ संस्थानों के जरिए तेजी और प्रभावशीलता के साथ प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा सकेगी, जिससे राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।