पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का मतदान जैसे ही समाप्त हुआ, वैसे ही सामने आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक इस बार मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन तस्वीर यह बनती दिख रही है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में स्पष्ट बहुमत के करीब पहुंचती नजर आ रही है, जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कोलकाता सहित पूरे राज्य में दो चरणों में हुए मतदान के बाद जैसे ही घड़ी ने शाम साढ़े छह बजाए, अलग-अलग एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आने लगे। इन अनुमानों में चार प्रमुख एजेंसियों—चाणक्य स्ट्रैटजी, ABP News–CVoter, P-Marq और Matrize—ने BJP को बढ़त देते हुए बहुमत की ओर इशारा किया है। हालांकि People’s Pulse का एग्जिट पोल एक अलग तस्वीर पेश करता है, जिसमें TMC की वापसी की संभावना जताई गई है। यही वजह है कि अंतिम परिणाम को लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार है।
इस बार चुनाव में एक और खास बात देखने को मिली—रिकॉर्ड मतदान। करीब 90 प्रतिशत मतदान ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। दूसरे चरण में तो मतदान का प्रतिशत 91.88 तक पहुंच गया, जो राज्य के राजनीतिक इतिहास में काफी अहम माना जा रहा है। पूर्व बर्दवान में सबसे ज्यादा वोटिंग दर्ज हुई, जबकि हुगली, नदिया, हावड़ा और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में भी मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि महिलाओं ने इस चुनाव में पुरुषों से अधिक भागीदारी दिखाई। करीब 92.28 प्रतिशत महिला मतदाताओं का मतदान करना इस बात का संकेत है कि इस बार चुनाव में महिला वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही फैक्टर कई सीटों पर परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
चुनाव का मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC और BJP के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा गया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान दोनों दलों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप और कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने इस चुनाव को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया।
एग्जिट पोल के आंकड़े भले ही BJP को बढ़त दिखा रहे हों, लेकिन राजनीति में अंतिम फैसला आंकड़ों से नहीं, बल्कि मतगणना से तय होता है। 4 मई को जब वोटों की गिनती होगी, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि बंगाल की जनता ने किसे सत्ता की बागडोर सौंपने का फैसला किया है। फिलहाल इतना तय है कि इस बार का चुनाव नतीजा पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।