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छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और ‘चर्च नेटवर्क’ पर सियासी घमासान, जांच एजेंसियों की नजर बस्तर से धमतरी तक

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छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और गांव-गांव तक फैलते चर्च नेटवर्क को लेकर माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। हालिया खुलासों के बाद मामला अब सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों और सियासत—दोनों के केंद्र में आ गया है। Enforcement Directorate की जांच में यह सामने आया कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी डेबिट कार्ड्स के जरिए करीब 95 करोड़ रुपए भारत लाए गए। इसी के बाद अंतरराष्ट्रीय मिशनरी संस्था The Timothy Initiative का नाम चर्चा में आया, जिसने जांच को और गंभीर बना दिया है।

बताया जा रहा है कि यह संगठन खुद को एक वैश्विक मिशनरी नेटवर्क के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य हर गांव तक पहुंच बनाना है। एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या छत्तीसगढ़ के बस्तर, धमतरी और राजनांदगांव जैसे इलाकों में सक्रिय नेटवर्क इसी मॉडल से जुड़ा है। खासतौर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फंडिंग के इस्तेमाल और उसके मकसद को लेकर जांच और गहराई से की जा रही है।

जांच के दायरे में स्थानीय पास्टर नेटवर्क, ट्रेनिंग मॉड्यूल, डिजिटल कम्युनिकेशन और फंड ट्रेल शामिल हैं। एजेंसियों को शक है कि अगर इन सभी कड़ियों को जोड़ा गया तो एक बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 6.5 करोड़ रुपए की रकम केवल बस्तर और धमतरी जैसे क्षेत्रों से निकाली गई, जिससे शक और गहरा गया है कि यह पैसा जमीनी स्तर पर गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ हो सकता है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा के नेताओं ने इसे सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा बताया है। वहीं कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को मौजूदा सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए पलटवार कर रही है और जवाब मांग रही है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली फोकस अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसके नतीजों पर टिक गया है।

छत्तीसगढ़ के कई जिलों—जैसे जशपुर, सरगुजा, रायगढ़, कबीरधाम, बिलासपुर, राजनांदगांव और नारायणपुर—में पहले से ही धर्मांतरण को लेकर विवाद होते रहे हैं। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे प्रेयर ग्रुप और ‘हाउस चर्च’ के जरिए गतिविधियां चलने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति भी बनी रहती है।

राजनांदगांव में हुई एक कार्रवाई ने भी इस मामले को और गंभीर बना दिया। यहां पुलिस ने एक पास्टर को गिरफ्तार कर कुछ दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और कथित ट्रेनिंग मॉड्यूल बरामद किए थे। हालांकि इस केस में सीधे तौर पर किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह पूरा मॉडल किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

अब पूरा मामला जांच के उस मोड़ पर है, जहां हर नई कड़ी बड़े खुलासे की ओर इशारा कर सकती है। सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ अलग-अलग घटनाओं का जुड़ाव है या फिर इसके पीछे कोई संगठित और व्यापक नेटवर्क काम कर रहा है। आने वाले समय में जांच की दिशा ही तय करेगी कि यह मामला कितना बड़ा रूप लेता है।

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