छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले न्यायिक कार्यों को तेज और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नया रोस्टर जारी कर दिया है। नए रोस्टर के अनुसार 7 मई गुरुवार से हाईकोर्ट में 4 डिवीजन बेंच और 14 सिंगल बेंचों में नियमित सुनवाई शुरू होगी। अदालत ने अलग-अलग प्रकार के सिविल, आपराधिक, टैक्स और जनहित से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के उद्देश्य से बेंचों का पुनर्गठन किया है।
नए रोस्टर के तहत पहली डिवीजन बेंच में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल शामिल रहेंगे। यह बेंच रिट अपील, हेबियस कॉर्पस, जनहित याचिका, आपराधिक अवमानना और अन्य विशेष मामलों की सुनवाई करेगी। हाईप्रोफाइल और संवेदनशील मामलों को इस बेंच में प्राथमिकता के साथ लिया जाएगा।
दूसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल को जिम्मेदारी दी गई है। यह बेंच उन सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी जो किसी अन्य बेंच को आवंटित नहीं किए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 2022 तक के लंबित अल्ट्रा वायर्स मामलों की सुनवाई भी इसी बेंच में की जाएगी।
तीसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन.के. व्यास शामिल रहेंगे। यह बेंच वर्ष 2016 से लंबित सभी एक्विटल अपीलों की सुनवाई करेगी। लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए इस बेंच को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं चौथी डिवीजन बेंच में जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत को शामिल किया गया है। यह बेंच ऐसे सभी सिविल मामलों की सुनवाई करेगी जो अन्य बेंचों में शामिल नहीं हैं। साथ ही मैट्रीमोनियल फर्स्ट अपील, टैक्स मामलों और संविधान के अनुच्छेद 323-ए व 323-बी के तहत दायर रिट याचिकाओं पर भी सुनवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिवीजन बेंचों के अलावा चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच समेत कुल 14 सिंगल बेंचों में भी नियमित सुनवाई जारी रहेगी। नए रोस्टर के जरिए अदालत लंबित मामलों के तेजी से निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए रोस्टर से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और पक्षकारों को जल्द राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी। ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले हाईकोर्ट का यह कदम न्यायिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।