अमेरिका ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और आक्रामक बना दिया है। पूर्वी प्रशांत महासागर में अमेरिकी सेना ने एक संदिग्ध नाव पर हवाई हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिकी सेना ने समुद्र में ड्रग्स तस्करी से जुड़ी संदिग्ध नावों को निशाना बनाया है। इससे पहले कैरेबियन सागर में भी एक ऐसी ही कार्रवाई में दो लोगों की मौत हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को जिस नाव पर हमला किया गया, उस पर भारी मात्रा में ड्रग्स ले जाए जाने का शक था। अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी जारी किया है। हालांकि अब तक सेना की ओर से यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है कि नाव में वास्तव में मादक पदार्थ मौजूद थे।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने लातिन अमेरिकी जलक्षेत्र में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ रखा है। प्रशासन इस अभियान को ‘नार्कोटेररिज्म’ यानी मादक पदार्थ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई बता रहा है। सितंबर की शुरुआत से जारी इस सैन्य अभियान में अब तक कम से कम 191 लोगों की मौत हो चुकी है।
दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया में ईरान के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के बावजूद अमेरिका ने लातिन अमेरिकी क्षेत्र में अपने अभियान को और तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका में ड्रग्स सप्लाई रोकने और ओवरडोज से होने वाली मौतों को कम करने के लिए यह सख्त नीति अपना रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने हाल के महीनों में इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। इसे कई दशकों बाद पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती माना जा रहा है। यह अभियान उस कार्रवाई के बाद और चर्चा में आया, जिसमें निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया था। वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं, हालांकि उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है।
इस पूरे अभियान को लेकर अब गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों और आलोचकों का कहना है कि अमेरिका जिन लोगों को ‘नार्कोटेररिस्ट’ बता रहा है, उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए हैं। आलोचकों ने बिना स्पष्ट प्रमाण समुद्र में सीधे सैन्य हमले करने की कानूनी वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की सैन्य कार्रवाई भविष्य में बड़े कूटनीतिक विवाद और मानवाधिकार बहस को जन्म दे सकती है। फिलहाल अमेरिका अपने अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा और ड्रग्स विरोधी नीति का हिस्सा बता रहा है।