तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तीन दिन बाद भी राज्य में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी सुपरस्टार विजय की ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़े (118) का समर्थन जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इसी बीच, राज्य में ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) ने अपने विधायकों में टूट-फूट की आशंका को देखते हुए उन्हें पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के एक लग्जरी रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है।
राज्यपाल का विजय को दोटूक जवाब: 118 विधायकों का लाओ समर्थन
टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को राजभवन पहुँचकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की थी और सरकार बनाने का दावा पेश किया था। विजय ने राज्यपाल को 112 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था, जिसमें कांग्रेस के विधायकों का समर्थन भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, राज्यपाल ने इस दावे को यह कहते हुए वापस भेज दिया कि सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत यानी 118 विधायकों का समर्थन पत्र अनिवार्य है। राज्यपाल के इस रुख के बाद से ही राज्य में राजनीतिक जोड़-तोड़ की कवायद तेज हो गई है।
AIADMK की किलेबंदी: पुडुचेरी के ‘द शोर त्रिशवम’ में रुके विधायक
विधायकों की खरीद-फरोख्त की संभावनाओं को शून्य करने के लिए एआईएडीएमके प्रमुख पलानीस्वामी ने अपने करीब 15 विधायकों को पुडुचेरी भेज दिया है।
सुरक्षित ठिकाना: पलानीस्वामी के करीबी सीवी शनमुगम ने पुडुचेरी के प्रसिद्ध ‘द शोर त्रिशवम’ रिजॉर्ट में 20 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं।
कड़ी निगरानी: विधायकों को बाहरी दुनिया और अन्य दलों के संपर्कों से दूर रखने के लिए रिजॉर्ट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और विधायकों को भी यहाँ लाया जा सकता है, क्योंकि सरकार गठन की स्थिति पल-पल बदल रही है।
TVK को समर्थन पर एआईएडीएमके में दो फाड़?
रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की मुख्य वजह एआईएडीएमके के भीतर बढ़ता आंतरिक मतभेद माना जा रहा है। चर्चा है कि पार्टी के कुछ विधायक सुपरस्टार विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को समर्थन देने के पक्ष में अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। वहीं, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व किसी भी हाल में विजय को समर्थन नहीं देने का ऐलान कर चुका है। इस बीच, एआईएडीएमके की अपनी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी डीएमके (DMK) के साथ ‘बैक चैनल’ बातचीत की खबरें भी गलियारों में तैर रही हैं, जिसने सत्ता के संघर्ष को और अधिक उलझा दिया है।
आगे क्या? गठबंधन और फ्लोर टेस्ट पर टिकी नजरें
तमिलनाडु की राजनीति अब उस मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ सुपरस्टार विजय को बहुमत साबित करने के लिए छोटे दलों और निर्दलीयों के साथ-साथ विपक्षी खेमे में सेंधमारी की जरूरत है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विजय जल्द ही 118 विधायकों की सूची पेश नहीं कर पाते, तो राज्यपाल सबसे बड़े गठबंधन या दूसरी बड़ी पार्टी को मौका दे सकते हैं। फिलहाल, पूरा फोकस पुडुचेरी के रिजॉर्ट और चेन्नई के राजभवन पर टिका हुआ है, जहाँ से राज्य के अगले मुख्यमंत्री का भविष्य तय होगा।