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AI में चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी, भारत-अमेरिका मिलकर बनाएंगे नई टेक्नोलॉजी गठबंधन

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भारत और अमेरिका के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और उभरती तकनीकों को लेकर रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में अमेरिका की वरिष्ठ अधिकारी Bethany Morrison ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश अब ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे चीन जैसे विरोधी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।

यूएस-इंडिया AI एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी फोरम को संबोधित करते हुए मॉरिसन ने कहा कि नई तकनीकों की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए भारत और अमेरिका को सुरक्षित, भरोसेमंद और खुले तकनीकी ढांचे पर काम करना होगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भविष्य की तकनीकी साझेदारी ऐसी होनी चाहिए जो विश्वसनीय सप्लाई चेन, इंटरऑपरेबिलिटी और सुरक्षा मानकों पर आधारित हो।

मॉरिसन ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को विश्वस्तरीय तकनीकों तक पहुंच मिले और उनका इस्तेमाल समाज के विकास तथा लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए किया जाए। उन्होंने AI को भविष्य की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बताते हुए कहा कि इसके फायदे तभी पूरी तरह मिल सकते हैं जब तकनीकी सहयोग खुलेपन और भरोसे पर आधारित हो।

अपने संबोधन में उन्होंने बिना किसी देश का नाम सीधे लिए यह भी कहा कि भारत और अमेरिका को विरोधी देशों पर तकनीकी निर्भरता से बचना होगा। माना जा रहा है कि उनका इशारा चीन की ओर था, जो लंबे समय से वैश्विक टेक सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में बड़ी भूमिका निभाता रहा है।

AI सेक्टर में तेजी से बढ़ते निवेश का जिक्र करते हुए मॉरिसन ने बताया कि साल 2026 की पहली तिमाही में निजी कंपनियों ने AI तकनीकों के विकास में 300 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। इसमें आधे से अधिक निवेश अमेरिकी कंपनियों द्वारा किया गया है। इससे साफ है कि दुनिया भर में AI को लेकर प्रतिस्पर्धा और निवेश दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने भारतीय कंपनियों की भी जमकर सराहना की। मॉरिसन ने कहा कि भारत की टेक कंपनियां AI और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। उन्होंने हाल ही में आयोजित SelectUSA Investment Summit का जिक्र करते हुए बताया कि भारतीय कंपनियों ने वहां 1.1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और तकनीकी संबंधों का मजबूत संकेत माना जा रहा है।

अमेरिकी अधिकारी ने Narendra Modi के नेतृत्व की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार यह अच्छी तरह समझती है कि AI तकनीक का इस्तेमाल आर्थिक विकास और समृद्धि बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही इससे जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर सतर्क रहना भी बेहद जरूरी है।

मॉरिसन के अनुसार भारत और अमेरिका आने वाले समय में तकनीकी नवाचार के अगले दौर में एक मजबूत साझेदार के रूप में उभर सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश मिलकर AI के भविष्य को दिशा देंगे और वैश्विक स्तर पर नई तकनीकी नेतृत्व क्षमता विकसित करेंगे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और भारत के बीच AI, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और एडवांस टेक्नोलॉजी में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में वैश्विक भू-राजनीति और टेक इंडस्ट्री दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया तकनीकी सप्लाई चेन को लेकर नए साझेदारों की तलाश कर रही है।

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