सोना और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। खासतौर पर चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया है। सिर्फ एक हफ्ते में 1 किलो चांदी की कीमत 15,269 रुपये बढ़कर 2.56 लाख रुपये तक पहुंच गई है। पिछले हफ्ते यानी 30 अप्रैल को चांदी का भाव करीब 2.40 लाख रुपये प्रति किलो था, लेकिन अब इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है।
वहीं सोने की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि चांदी की तुलना में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी रही। 10 ग्राम सोना इस हफ्ते 815 रुपये महंगा होकर 1.51 लाख रुपये तक पहुंच गया। 30 अप्रैल को यही कीमत करीब 1.50 लाख रुपये थी।
अगर पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में अब तक सोना 17,883 रुपये तक महंगा हो चुका है। वहीं चांदी में करीब 25,180 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना लगभग 1.33 लाख रुपये पर था, जो अब 1.51 लाख रुपये के पार पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी भी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.56 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
इस दौरान सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतें अलग होने के पीछे कई कारण होते हैं। इसमें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी कॉस्ट सबसे बड़ा कारण माना जाता है। एक शहर से दूसरे शहर तक सोना पहुंचाने में सुरक्षा और ईंधन का खर्च जुड़ता है, जिससे कीमतों में अंतर आता है।
इसके अलावा स्थानीय मांग और सप्लाई भी रेट तय करने में अहम भूमिका निभाती है। दक्षिण भारत में सोने की खपत काफी ज्यादा होने के कारण वहां के बाजारों का असर कीमतों पर साफ दिखाई देता है। वहीं ज्वेलरी एसोसिएशन और ज्वेलर्स के पुराने स्टॉक की खरीद कीमत भी स्थानीय रेट को प्रभावित करती है।
इस बीच केंद्र सरकार ने सोने-चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब इन कीमती धातुओं के गहनों को “फ्री” कैटेगरी से हटाकर “रिस्ट्रिक्टेड” कैटेगरी में डाल दिया है। यानी अब विदेशों से ज्वेलरी मंगाने के लिए विशेष लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
Directorate General of Foreign Trade यानी DGFT के अनुसार यह फैसला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू बाजार और भारतीय कारीगरों को फायदा मिलेगा।
हालांकि इस फैसले के कुछ नुकसान भी बताए जा रहे हैं। अब तक थाईलैंड जैसे देशों से कम टैक्स पर सस्ते गहने भारत आते थे। लाइसेंस नियम लागू होने के बाद विदेशी ज्वेलरी की सप्लाई सीमित हो सकती है, जिससे स्थानीय बाजार में कीमतों और मेकिंग चार्ज पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर इसका फायदा भारतीय ज्वेलरी उद्योग को मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी गहनों की जगह अब देश में बने गहनों की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय कारीगरों और डिजाइनरों को ज्यादा काम मिलेगा। साथ ही हॉलमार्किंग नियमों के कारण ग्राहकों को शुद्ध सोना और चांदी मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
सोना खरीदते समय विशेषज्ञ हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड खरीदने की सलाह देते हैं। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की पुष्टि होती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से कीमत की जांच करना भी जरूरी माना जाता है।
वहीं असली चांदी पहचानने के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट और कपड़े से रगड़ने जैसे घरेलू तरीके भी काफी लोकप्रिय हैं। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर की चाल और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।