असम की राजनीति में चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। भाजपा विधायक दल की अहम बैठक में हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि राज्य की सत्ता एक बार फिर उनके हाथों में ही रहने वाली है। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हिमंता बिस्वा सरमा 12 मई को भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। भाजपा की इस बड़ी जीत ने न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति में पार्टी की पकड़ को और मजबूत कर दिया है।
4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 126 में से 82 सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे असम की जनता द्वारा विकास और स्थिर नेतृत्व पर जताए गए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक, हर तरफ जश्न का माहौल बना हुआ है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने पिछले कार्यकाल में जिस आक्रामक प्रशासनिक शैली और तेज फैसलों के जरिए अपनी पहचान बनाई, उसी का असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया। स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार के काम को जनता ने खुलकर समर्थन दिया। यही वजह रही कि भाजपा ने एक बार फिर प्रचंड बहुमत हासिल कर विपक्ष को पीछे छोड़ दिया।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हिमंता बिस्वा सरमा अब केवल असम के नेता नहीं रह गए हैं, बल्कि वे पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो चुके हैं। उनकी रणनीतिक क्षमता और संगठन पर मजबूत पकड़ ने भाजपा को उन इलाकों में भी मजबूत किया, जहां कभी पार्टी की मौजूदगी बेहद कमजोर मानी जाती थी। भाजपा नेतृत्व भी सरमा पर पूरा भरोसा जता रहा है और यही कारण है कि विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर बिना किसी विरोध के मुहर लग गई।
12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह बेहद भव्य होने वाला है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। गुवाहाटी में तैयारियां तेज कर दी गई हैं और पूरे शहर को सजाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। भाजपा इस आयोजन को सिर्फ शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि जनता के आशीर्वाद और पार्टी की लगातार तीसरी बड़ी सफलता के उत्सव के रूप में देख रही है।
हालांकि नई पारी के साथ चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। घुसपैठ, सीमा विवाद, बेरोजगारी और विकास से जुड़े मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहने वाले हैं। खासकर युवाओं के लिए रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ चुकी हैं। ऐसे में हिमंता सरकार पर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव भी रहेगा।
भाजपा समर्थकों का मानना है कि सरमा के नेतृत्व में असम अब विकास की नई रफ्तार पकड़ने वाला है। वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव परिणाम एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि फिलहाल असम की राजनीति में हिमंता बिस्वा सरमा का दबदबा कायम है।
अब पूरे देश की नजरें 12 मई के उस भव्य समारोह पर टिकी हैं, जब हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर असम की राजनीति में नया अध्याय शुरू करेंगे।