Meta Pixel

तकनीक और एआई बन रहे बुजुर्गों के नए साथी, बढ़ती उम्र में देंगे खुशी और बेहतर याददाश्त

Spread the love

अब बढ़ती उम्र सिर्फ आराम और दवाइयों तक सीमित नहीं रह गई है। नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई बुजुर्गों के जीवन को आसान, सक्रिय और खुशहाल बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जागरूकता के साथ सीमित स्क्रीन टाइम में तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की एक रिसर्च में सामने आया है कि नई डिजिटल स्किल सीखने वाले बुजुर्गों की याददाश्त में करीब 30 प्रतिशत तक सुधार देखा गया। रिसर्च के अनुसार जो सीनियर सिटीजन खुद मोबाइल एप्स चलाना सीखते हैं, वीडियो देखकर नई चीजें समझते हैं या ऑनलाइन क्लासेज में हिस्सा लेते हैं, उनके दिमाग की कार्यक्षमता ज्यादा सक्रिय रहती है। इससे सोचने-समझने की क्षमता मजबूत होती है और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक एआई आधारित टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म बुजुर्गों के लिए किसी पर्सनल ब्रेन कोच की तरह काम कर रहे हैं। एआई ट्यूटर के जरिए नई भाषा सीखना, संगीत समझना या नई स्किल्स सीखना दिमाग को लगातार एक्टिव बनाए रखता है। इस दौरान दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अधिक खुश महसूस करता है।

इतना ही नहीं, आज कई एआई आधारित एप्स बुजुर्गों की मानसिक क्षमता को समझकर उसी स्तर की पहेलियां और चुनौतियां देते हैं। इससे दिमाग लगातार नई चीजें सीखता रहता है और न्यूरोप्लास्टिसिटी बढ़ती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

स्मार्टवॉच और हेल्थ गैजेट्स भी बुजुर्गों के लिए वरदान बनते जा रहे हैं। ये डिवाइस दिल की धड़कन, सांसों की गति और नींद के पैटर्न में आने वाले छोटे बदलावों को रिकॉर्ड कर एआई सिस्टम तक पहुंचाते हैं। इससे कई बीमारियों के शुरुआती संकेत समय रहते पहचान लिए जाते हैं और इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि टेक्नोलॉजी बुजुर्गों के अकेलेपन को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है। वीडियो कॉल, व्हाट्सएप, ऑनलाइन ग्रुप और सोशल मीडिया के जरिए वे परिवार और दोस्तों से जुड़े रहते हैं। इससे तनाव और अकेलेपन की भावना कम होती है और रिश्तों में जुड़ाव बना रहता है।

नई तकनीक सीखने से बुजुर्गों का आत्मनिर्भरता का भाव भी बढ़ता है। जब वे खुद ऑनलाइन बैंकिंग करते हैं, यूट्यूब वीडियो चलाना सीखते हैं या मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो उनके दिमाग के न्यूरल नेटवर्क सक्रिय रहते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ तकनीक को सही तरीके से अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

यूरोप और अमेरिका में 60 से 80 वर्ष की उम्र के लोगों पर हुई रिसर्च में भी पाया गया कि जो बुजुर्ग नियमित रूप से स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करते हैं, उनमें समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने की क्षमता दूसरों की तुलना में बेहतर होती है।

हालांकि डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि तकनीक का उपयोग संतुलित तरीके से किया जाए। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए सीमित स्क्रीन टाइम, पर्याप्त आराम और सही जागरूकता के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *