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PM मोदी की अपील का असर! MP कैबिनेट में CM मोहन यादव बोले- पहले मंत्री खुद खर्च कम करें

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वैश्विक संकट, बढ़ती तेल कीमतों और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच अब बचत और संयम की चर्चा राजनीति के केंद्र में भी पहुंच गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील का असर अब Madhya Pradesh सरकार में भी दिखाई देने लगा है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मंत्रियों को साफ संदेश दिया कि जनता को सलाह देने से पहले खुद अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे विभागीय और व्यक्तिगत स्तर पर खर्च कम करने की दिशा में कदम उठाएं। पीएम मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन की बचत करने, गैर-जरूरी खर्च रोकने और स्वदेशी विकल्प अपनाने की अपील की थी। अब उसी संदेश को मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।

कैबिनेट बैठक के बाद जब पत्रकारों ने मंत्री Chaitanya Kumar Kashyap से पूछा कि क्या अब मंत्री साइकिल से मंत्रालय आएंगे, क्या काफिले कम होंगे और वाहन साझा किए जाएंगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह स्वैच्छिक विषय है। उन्होंने कहा कि वह खुद वेतन नहीं लेते और जितना संभव हो, उतना पालन किया जाना चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि मंत्रियों को आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक वाहन आवंटित होता है, हालांकि सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त वाहन साथ चलते हैं।

हालांकि पहले दिन इस अपील का असर बहुत ज्यादा दिखाई नहीं दिया। ज्यादातर मंत्री अपने पूरे काफिले के साथ मंत्रालय पहुंचे। लेकिन मंत्री कृष्णा गौर और संपत्तिया उइके का एक ही वाहन से मंत्रालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। इसे सरकार के संदेश के प्रतीकात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक में मंत्रियों को कई अहम सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि जनता को सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की बात भी कही गई। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल, किसानों को सोलर पंप अपनाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया है।

इसके अलावा माल ढुलाई के लिए रेलवे की गुड्स ट्रेनों के ज्यादा उपयोग और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को अगले एक साल तक टालने का सुझाव भी सामने आया है। सरकार चाहती है कि लोग विदेशी टूरिज्म के बजाय राज्य और देश के पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह अपील सिर्फ जनता तक सीमित रहेगी या मंत्री और अधिकारी भी अपनी जीवनशैली में वास्तविक बदलाव करेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अगर सरकार खुद सादगी और बचत का उदाहरण पेश करती है, तो जनता पर उसका असर कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते दबाव के बीच मध्य प्रदेश सरकार अब बचत, संयम और संसाधनों के नियंत्रित उपयोग को सरकारी एजेंडा का अहम हिस्सा बनाने जा रही है।

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