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रायपुर डबल मर्डर केस में हाईकोर्ट सख्त, प्रेमिका और मासूम बेटी की हत्या के दोषी की उम्रकैद बरकरार

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Chhattisgarh High Court ने रायपुर में हुए बहुचर्चित प्रेमिका और उसकी मासूम बेटी की दोहरी हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी विक्की उर्फ सुखीराम यादव की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पेश किए गए परिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और मेडिकल साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि उसके अपराध को लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं बचता।

हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। यह सनसनीखेज मामला जनवरी 2021 का है, जिसने पूरे रायपुर और प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।

मामले के अनुसार, आरोपी विक्की यादव के खिलाफ युवती ने पहले दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। बाद में युवती आरोपी पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी विवाद के चलते आरोपी ने कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि आरोपी ने मैदान के पास युवती पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने युवती की मासूम बेटी को रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया, जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से बच्ची की मौत हो गई।

अदालत ने अपने फैसले में इस बात का भी उल्लेख किया कि घटना के बाद आरोपी ने गांव के पूर्व सरपंच के सामने अपना जुर्म कबूल किया था। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर खून से सना चाकू और कपड़े बरामद किए गए थे। फॉरेंसिक जांच में हथियार और कपड़ों पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई थी।

इसके अलावा डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी और बच्ची के बीच जैविक संबंध को भी साबित किया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला और मजबूत हो गया। कोर्ट ने कहा कि भले ही यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन घटनाओं की पूरी श्रृंखला सीधे आरोपी की ओर इशारा करती है।

मेडिकल रिपोर्ट में भी स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत गले पर चाकू के गंभीर वार से हुई थी, जबकि बच्ची की मौत ट्रेन की चपेट में आने के कारण हुई। अदालत ने आरोपी की ओर से दिए गए सभी तर्कों को खारिज कर दिया। आरोपी ने अचानक उकसावे, मानसिक अस्थिरता और झूठे फंसाए जाने जैसे दावे किए थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें स्वीकार नहीं किया।

Ramesh Sinha और Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने बेहद क्रूर और सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। ऐसे में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी तरह के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जेल में रहकर ही अपनी पूरी सजा काटनी होगी। हाईकोर्ट के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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