छत्तीसगढ़ के Raigarh में पुलिस ने ऑनलाइन Indian Premier League सट्टा सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के अवैध नेटवर्क का खुलासा किया है। बुधवार को पुलिस ने छापेमार कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि एक आरोपी फरार होने में सफल रहा। इस कार्रवाई में पुलिस ने 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार 300 रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, यह अब तक जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी और हवाला नेटवर्क के खिलाफ की गई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जांच में सट्टे से अर्जित अवैध रकम को वैध बनाने के सबूत भी मिले हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करण चौधरी, पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से नकदी के अलावा एक नोट गिनने की मशीन, चार मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया। कुल मिलाकर करीब 1 करोड़ 3 लाख 86 हजार 300 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
पुलिस की शुरुआती जांच में मोबाइल फोन, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पूरे नेटवर्क का संचालन रायगढ़ के करण चौधरी और जसमीत सिंह बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार के इशारे पर किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और फाइनेंशियल ट्रेल के जरिए पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि करण चौधरी लंबे समय से रायगढ़, सक्ती, रायपुर, बिलासपुर और दिल्ली तक फैले नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का संचालन कर रहा था। पुलिस के अनुसार, सट्टे से कमाई गई रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय आरोपी अलग-अलग कारोबारी चैनलों के जरिए कैश डंप करते थे।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और दूसरे व्यावसायिक माध्यमों का इस्तेमाल कर रकम को हवाला चैनलों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। पूछताछ में पता चला कि Krishna Pride Tower में रहने वाले पुष्कर अग्रवाल और उसके पिता सुनील अग्रवाल इस पूरे मनी मूवमेंट नेटवर्क के अहम हिस्से थे और ब्लैक मनी को हवाला के जरिए व्हाइट करने का काम कर रहे थे।
करण चौधरी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने कृष्णा प्राइड टावर स्थित फ्लैट पर छापा मारा। यहां से सुनील अग्रवाल के कब्जे से 50 लाख रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं पुष्कर अग्रवाल के पास से 52 लाख 60 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल जब्त किए गए।
इलेक्ट्रॉनिक डेटा, यूपीआई ट्रांजेक्शन, चैट रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपने निजी अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करते थे। इसके बजाय कर्मचारियों, परिचितों और सहयोगियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए लेनदेन किया जाता था।
Shashi Mohan Singh ने इस कार्रवाई को लेकर सख्त संदेश देते हुए कहा कि जिले में सट्टा, हवाला और संगठित आर्थिक अपराधों से जुड़े किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि रायगढ़ पुलिस आगे भी इसी सख्ती के साथ कार्रवाई जारी रखेगी।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।