Hindustan Petroleum Corporation Limited यानी HPCL ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन दर्ज करते हुए बड़ा मुनाफा कमाया है। कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 77% बढ़कर ₹6,065 करोड़ पहुंच गया। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और मजबूत बिक्री प्रदर्शन को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।
कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ ही बोर्ड ऑफ डायरेकर्स ने शेयरधारकों के लिए ₹19.25 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है। यह डिविडेंड ₹10 फेस वैल्यू वाले शेयरों पर दिया जाएगा। हालांकि इसे लागू करने के लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी। इससे पहले कंपनी वित्त वर्ष के दौरान ₹5 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड भी दे चुकी है।
HPCL के मजबूत नतीजों के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन यानी GRM में आया बड़ा उछाल रहा। चौथी तिमाही में कंपनी का GRM बढ़कर 14.27 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 8.44 डॉलर प्रति बैरल था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का औसत GRM 8.79 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया, जो पिछले साल 5.74 डॉलर था।
GRM=Refined Product Value−Crude Oil Cost−Refining CostGRM = \text{Refined Product Value} – \text{Crude Oil Cost} – \text{Refining Cost}
कंपनी की आय में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। चौथी तिमाही में उत्पादों की बिक्री से होने वाला रेवेन्यू 4.4% बढ़कर ₹1.23 लाख करोड़ रहा, जबकि कुल आय ₹1.24 लाख करोड़ तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में HPCL का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 168% उछलकर ₹18,046.89 करोड़ दर्ज किया गया।
इस दौरान केंद्र सरकार से भी कंपनी को बड़ी राहत मिली है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू LPG बिक्री पर हुए नुकसान यानी अंडर-रिकवरी की भरपाई के लिए HPCL को ₹7,920 करोड़ का मुआवजा देने की घोषणा की है। यह राशि नवंबर 2025 से 12 समान मासिक किस्तों में दी जाएगी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में इसकी पांच किस्तों के रूप में ₹3,300 करोड़ को मान्यता भी दे दी है।
रिफाइनिंग गतिविधियों की बात करें तो कंपनी ने इस तिमाही के दौरान कच्चे तेल के चार नए ग्रेड्स की प्रोसेसिंग शुरू की, जिससे पूरे साल में प्रोसेस किए गए ग्रेड्स की संख्या 52 तक पहुंच गई। हालांकि चौथी तिमाही में क्रूड थ्रूपुट घटकर 6.43 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 6.74 मिलियन टन था।
वहीं घरेलू बिक्री में सुधार देखने को मिला। कंपनी की घरेलू बिक्री बढ़कर 12.43 मिलियन टन रही, जबकि पिछले साल यह 12.11 मिलियन टन थी।
HPCL ने इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर भी बड़ा निवेश किया है। चौथी तिमाही में कंपनी ने ₹4,611 करोड़ का कैपेक्स किया, जबकि पूरे वित्त वर्ष में यह खर्च ₹15,705 करोड़ रहा। यह निवेश रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने, मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, नई बिजनेस लाइनों और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी सुधारने पर किया गया।
कंपनी ने आखिरी तिमाही में 526 नए रिटेल आउटलेट और 75 नए CNG स्टेशन भी शुरू किए हैं, जिससे उसका नेटवर्क और मजबूत हुआ है।
तिमाही नतीजों के बाद शेयर बाजार में भी HPCL के शेयर में तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर करीब 5% से ज्यादा उछलकर ₹389 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। पिछले एक महीने में शेयर करीब 12% चढ़ चुका है, हालांकि इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें गिरावट बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रहते हैं और ऊर्जा मांग में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में HPCL का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।