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महंगाई रोकने के लिए बड़ा फैसला, भारत ने चीनी निर्यात पर लगाई रोक

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देश में बढ़ती महंगाई और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 13 मई 2026 से लागू हो गया है और 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक जारी रहेगा। इस संबंध में Directorate General of Foreign Trade ने आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

सरकार के इस फैसले के बाद अब रॉ शुगर, व्हाइट शुगर और रिफाइंड शुगर की एक्सपोर्ट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले ये उत्पाद ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में आते थे, लेकिन अब इन्हें ‘प्रोहिबिटेड’ श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब बिना विशेष सरकारी अनुमति के चीनी का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि घरेलू बाजार में बढ़ती मांग और त्योहारी सीजन को देखते हुए चीनी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर भारतीय बाजार पर न पड़े, इसलिए यह फैसला लिया गया है।

बीते कुछ वर्षों में भारत से चीनी निर्यात में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 में देश से करीब 7 मिलियन टन चीनी का निर्यात हुआ था। इसके बाद 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 मिलियन टन तक पहुंच गया। हालांकि 2023-24 में निर्यात घटकर 1 मिलियन टन रह गया था, लेकिन 2024-25 में फिर से इसमें तेजी आई और 7.75 मिलियन टन शुगर एक्सपोर्ट की गई।

हालांकि सरकार ने पूरी तरह से सभी निर्यात बंद नहीं किए हैं। कुछ विशेष अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी की सप्लाई जारी रहेगी। भारत CXL और TRQ कोटा के तहत इन देशों को पहले की तरह चीनी भेजता रहेगा। इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत होने वाले निर्यात पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

सरकार ने उन व्यापारियों को भी राहत दी है जिनकी खेप पहले से बंदरगाहों तक पहुंच चुकी है। जिन जहाजों में नोटिफिकेशन जारी होने से पहले लोडिंग शुरू हो गई थी, उन्हें निर्यात की अनुमति मिलेगी। साथ ही जिन कंसाइनमेंट्स का शिपिंग बिल पहले ही फाइल हो चुका है या जो कस्टम सिस्टम में रजिस्टर्ड हैं, वे भी इस बैन से फिलहाल बाहर रहेंगे।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी पड़ोसी या अन्य देश में खाद्य संकट जैसी स्थिति बनती है और वहां की सरकार भारत से चीनी की मांग करती है, तो विशेष अनुमति के जरिए सीमित निर्यात की मंजूरी दी जा सकती है।

फिलहाल यह प्रतिबंध सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। यदि इस अवधि के बाद सरकार बैन नहीं बढ़ाती है, तो चीनी का एक्सपोर्ट स्टेटस फिर से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में लौट आएगा। माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने और आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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