Meta Pixel

शुरुआती तेजी के बाद फिसला शेयर बाजार, सेंसेक्स हाई से 600 अंक टूटा, निफ्टी 23650 के नीचे बंद

Spread the love

शुक्रवार को शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह बाजार ने मजबूत शुरुआत की और सेंसेक्स-निफ्टी शानदार तेजी के साथ खुले, लेकिन दिन चढ़ने के साथ निवेशकों का मूड बदल गया। मुनाफावसूली, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें, रुपये की रिकॉर्ड गिरावट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बाजार पर ऐसा दबाव बनाया कि शुरुआती बढ़त पूरी तरह गायब हो गई। दिन के अंत तक सेंसेक्स अपने ऊपरी स्तर से करीब 600 अंक टूटकर लाल निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 23,650 के नीचे फिसल गया।

कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 471 अंकों की मजबूती के साथ 75,870 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया था। इसी तरह निफ्टी भी 149 अंक उछलकर 23,839 के स्तर तक पहुंचा। शुरुआती तेजी से निवेशकों में उत्साह दिखाई दिया, लेकिन ऊंचे स्तरों पर बिकवाली शुरू होते ही बाजार की दिशा बदल गई। दोपहर बाद दबाव लगातार बढ़ता गया और अंत में सेंसेक्स 160.73 अंक गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 46 अंक टूटकर 23,643.50 के स्तर पर बंद हुआ।

अगर पूरे सप्ताह की बात करें तो बाजार के लिए यह हफ्ता काफी कमजोर साबित हुआ। सेंसेक्स में लगभग 2.2 फीसदी और निफ्टी में करीब 2.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही पिछले दो हफ्तों से जारी तेजी का सिलसिला भी टूट गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 4.6 फीसदी तक लुढ़क गया, जबकि मिडकैप इंडेक्स में 2.2 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने और व्यापार घाटा गहराने की आशंका तेज हो गई, जिसके चलते निवेशकों ने बाजार में सतर्क रुख अपना लिया।

रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 96 के स्तर तक पहुंच गया, जिसे अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत डॉलर, बढ़ती क्रूड कीमतें और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। कमजोर रुपये का असर विदेशी निवेश और आयात लागत दोनों पर पड़ता है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और बिगड़ गया।

वैश्विक बाजारों से भी कोई राहत नहीं मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी साफ दिखाई दी। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।

जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। ईरान से जुड़े घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान विवाद के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा चीन और अमेरिका के बीच हुई बातचीत से भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।

हालांकि आईटी सेक्टर में कुछ खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए काफी नहीं रही। अदाणी एंटरप्राइजेज और ओएनजीसी जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जबकि कमजोर तिमाही नतीजों के बाद टाइटन के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर की चाल और मिडिल ईस्ट के हालात पर बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *