Iran और United States के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है। ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए पांच बेहद सख्त शर्तें सामने रख दी हैं। इन शर्तों ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और क्षेत्र में फिर से अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने हाल ही में अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने और क्षेत्रीय तनाव खत्म करने जैसी मांगें शामिल थीं। लेकिन वाशिंगटन ने इसके जवाब में बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक अमेरिका ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि वह किसी भी तरह का युद्ध हर्जाना या मुआवजा देने को तैयार नहीं है। इसके अलावा विदेशों में फ्रीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड्स और संपत्तियों को जारी करने से भी अमेरिका ने इनकार कर दिया है।
ईरान चाहता था कि उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाए और लेबनान समेत कई मोर्चों पर जारी दुश्मनी खत्म की जाए। लेकिन अमेरिकी रुख ने तेहरान की इन उम्मीदों पर बड़ा झटका पहुंचाया है।
अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे विवादित शर्त ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने मांग की है कि ईरान अपने पास मौजूद लगभग 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे। इसके साथ ही ईरान को अपने देश में सिर्फ एक परमाणु संयंत्र चालू रखने की अनुमति देने की बात कही गई है।
इन शर्तों को लेकर अब तक दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक संयुक्त बयान सामने नहीं आया है, लेकिन खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये शर्तें ईरान के लिए स्वीकार करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका ने सीजफायर को लेकर भी शर्त रखी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वाशिंगटन चाहता है कि अलग-अलग मोर्चों पर जारी संघर्ष विराम तभी आगे बढ़े, जब दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हो जाए।
ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका शांति वार्ता के जरिए अपने राजनीतिक और सैन्य हित साधने की कोशिश कर रहा है। उनका आरोप है कि जिन उद्देश्यों को अमेरिका युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर पाया, अब वह उन्हें बातचीत के जरिए हासिल करना चाहता है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ हफ्तों से Pakistan की मध्यस्थता के जरिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान चल रहा था। लेकिन अब अमेरिका की नई शर्तों के बाद बातचीत का रास्ता और मुश्किल होता दिखाई दे रहा है।
गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और Israel द्वारा तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर बड़े हमले किए गए थे। इसके बाद करीब 40 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच तनाव और संघर्ष का दौर चला। बाद में 8 अप्रैल को किसी तरह युद्धविराम पर सहमति बनी थी।
इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को Islamabad में दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर भी हुआ था, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
अब अमेरिका की इन नई शर्तों ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत में जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में दोबारा गंभीर संकट पैदा हो सकता है।