छत्तीसगढ़ के Dhamtari जिले के सिहावा थाना क्षेत्र स्थित जैतपुरी गांव में वन विभाग की टीम पर हमला होने से हड़कंप मच गया। वन अतिक्रमण और अवैध जंगल कटाई के मामले में कार्रवाई करने पहुंची टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अधिकारियों को खुद को बचाकर बाहर निकलना पड़ा और तुरंत पुलिस बल बुलाना पड़ा। घटना के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य के उपनिदेशक वरुण जैन अपनी टीम के साथ अतिक्रमणकारियों की गिरफ्तारी के लिए जैतपुरी गांव पहुंचे थे। यह इलाका लंबे समय से वन अतिक्रमण और जंगल कटाई को लेकर संवेदनशील माना जाता रहा है। टीम जैसे ही गांव पहुंची, बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख अधिकारियों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और तुरंत सिहावा पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पुलिस बल पहुंचा और हालात को नियंत्रित किया गया।
इस पूरे मामले ने इसलिए भी ज्यादा गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि हाल ही में वन विभाग की जांच में इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण और जंगल कटाई का खुलासा हुआ था। ड्रोन सर्वे और विभागीय जांच में सामने आया कि पिछले करीब 15 वर्षों में लगभग 1 लाख पेड़ों की अवैध कटाई की गई और करीब 106 हेक्टेयर यानी 265 एकड़ वनभूमि पर कब्जा कर लिया गया।
यह इलाका Sitanadi Tiger Reserve के कोर जोन और महानदी कैचमेंट क्षेत्र में आता है, जिसे पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2011 में जहां करीब 45 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण था, वह अगले दशक में बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
वन विभाग के मुताबिक पहले इस क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 पेड़ मौजूद थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 25 से 50 पेड़ों तक रह गई है। आरोप है कि बड़े पैमाने पर खेती के लिए जंगल साफ किए गए।
इस मामले में वन विभाग ने 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। विभाग की ओर से सभी को बेदखली नोटिस भी जारी किए गए थे। इसी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए टीम गांव पहुंची थी, लेकिन वहां हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा।
उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि वे 166 अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार करने पहुंचे थे। तभी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उनकी टीम को घेर लिया और हमला शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि काफी मुश्किल से टीम वहां से बाहर निकल पाई।
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने संवेदनशील इलाके में वन विभाग की टीम बिना पुलिस सुरक्षा के कार्रवाई करने क्यों पहुंची। साथ ही इतने बड़े स्तर पर वर्षों से जारी अवैध कब्जे और जंगल कटाई पर पहले प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में इस तरह का अतिक्रमण वन्यजीवों और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अब प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुट गया है।