छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जगदलपुर में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah कर रहे हैं। बैठक में Yogi Adityanath समेत छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मौजूद हैं। लंबे समय तक नक्सल हिंसा से जूझते रहे बस्तर में इतने बड़े स्तर की बैठक को केंद्र सरकार के बड़े रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में नक्सल उन्मूलन, राज्यों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, आदिवासी कल्याण, आंतरिक सुरक्षा और सीमा विवाद जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। साथ ही रेल नेटवर्क अपग्रेडेशन और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास योजनाओं को लेकर भी मंथन किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बस्तर में इस बैठक का आयोजन केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार की बदली हुई रणनीति और बस्तर की नई छवि पेश करने का प्रयास भी है। जिस इलाके को कभी नक्सल हिंसा का गढ़ माना जाता था, वहां अब चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि हालात बदल चुके हैं।
गृह मंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख दिखाते रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने कई बड़े ऑपरेशन चलाए, जिनमें कई नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए। सरकार दावा कर रही है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है और अब यहां विकास की नई शुरुआत की जा रही है।
अपने दौरे के दौरान अमित शाह नेतानार गांव भी पहुंचे, जहां उन्होंने अमर शहीद गुंडाधुर को याद करते हुए कहा कि बस्तर की ऐतिहासिक और आदिवासी पहचान को नई ताकत दी जाएगी। शाह ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर का विकास रुका रहा, लेकिन अब सरकार इस क्षेत्र को देश के प्रमुख विकास और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि एक समय ऐसा था जब बस्तर में सुरक्षाबलों पर हमले, स्कूलों को नुकसान पहुंचाना और गरीबों का राशन लूटना आम बात थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और सरकार इस क्षेत्र को “गनतंत्र” से मुक्त कर विकास की मुख्यधारा में लाने का दावा कर रही है।
हालांकि इस बैठक को लेकर कांग्रेस ने सवाल भी उठाए हैं। Deepak Baij ने तंज कसते हुए कहा कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है तो इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल भी हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग विशेष विमानों से नेताओं के आने-जाने में लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री खुद ईंधन बचाने की अपील करते रहे हैं।
अब सभी की नजर बैठक के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है, जहां केंद्र सरकार बस्तर और नक्सलवाद को लेकर अपना आगे का रोडमैप स्पष्ट कर सकती है।