घरेलू शेयर बाजार में बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली हावी रही, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।
सुबह करीब 9:27 बजे सेंसेक्स 492 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 74,708 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी भी करीब 158 अंक टूटकर 23,459 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में देखने को मिला, जहां निवेशकों ने जमकर बिकवाली की।
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी बाजार के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर की कीमत 96.96 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई, जिससे विदेशी निवेशकों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही चौथी तिमाही के नतीजे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हों, लेकिन फिलहाल निवेशकों का ध्यान बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों पर ज्यादा टिका हुआ है। बॉन्ड यील्ड में लगातार मजबूती और आने वाले समय में कॉरपोरेट मुनाफे पर दबाव की आशंका ने बाजार का सेंटीमेंट कमजोर कर दिया है।
ऑटो और मेटल सेक्टर के अलावा बैंकिंग और आईटी शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ झुकते नजर आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजारों में कमजोरी बनी रही और कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो भारतीय बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार अस्थिरता देखी जा रही है। कभी विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देती है, तो कभी महंगाई और ग्लोबल संकेत बाजार को नीचे खींच लेते हैं। ऐसे में छोटे निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।