सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation यानी IOC ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा दिलाया है। कंपनी ने कहा है कि अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज रूट पर जारी संकट के बावजूद भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि कंपनी के पास एक महीने से ज्यादा का क्रूड ऑयल स्टॉक मौजूद है।
हालांकि कंपनी ने माना कि हॉर्मुज जलमार्ग प्रभावित होने के कारण LPG सप्लाई पर कुछ असर पड़ा है। यह रूट भारत की करीब 50% ऊर्जा सप्लाई और खाड़ी देशों से आने वाली लगभग 90% LPG सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। मौजूदा हालात में इस रूट पर दबाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, लेकिन IOC का कहना है कि देशभर में गैस और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।
IOC के डायरेक्टर फाइनेंस अनुज जैन ने बताया कि कंपनी ने मध्य पूर्व में तनाव शुरू होते ही अपनी सभी रिफाइनरियों को फुल कैपेसिटी पर संचालित करना शुरू कर दिया था। साथ ही कंपनी ने LPG सप्लाई के लिए नए स्रोतों से तत्काल खरीद शुरू कर दी है।
बताया गया है कि खाड़ी देशों से सप्लाई प्रभावित होने के बाद IOC अब इंडोनेशिया, नाइजीरिया, अंगोला और ओमान जैसे देशों से LPG और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद कर रही है। कंपनी का दावा है कि इससे देशभर में गैस की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है।
हॉर्मुज जलमार्ग को दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग माना जाता है। ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के बीच स्थित इस रूट से दुनिया के कुल कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डालता है।
इस बीच IOC ने अपने वित्तीय नतीजों में भी बड़ी छलांग दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 81 प्रतिशत बढ़कर 15,176 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 8,367 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।
मजबूत मुनाफे के बाद कंपनी ने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का भी ऐलान किया है। IOC बोर्ड ने 12.5 प्रतिशत फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जिसके तहत 10 रुपए फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 1.25 रुपए का लाभांश दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए AGM में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
कंपनी आने वाले वर्षों में रिफाइनरी विस्तार पर भी बड़ा निवेश करने जा रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए IOC ने करीब 32,700 करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च का प्लान बनाया है। इसके तहत पानीपत, गुजरात और बरौनी रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
पानीपत रिफाइनरी की क्षमता 15 MMTPA से बढ़ाकर 25 MMTPA की जा रही है। वहीं गुजरात और बरौनी रिफाइनरी विस्तार परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। कंपनी का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद IOC की तैयारी और वैकल्पिक सप्लाई रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहतभरी खबर है।