West Bengal की नई सरकार ने OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य की राजनीति और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम फैसला लिया है। Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली नई सरकार ने राज्य में कुल अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने की घोषणा की है।
सरकार के इस फैसले के बाद पूर्ववर्ती Mamata Banerjee सरकार के कार्यकाल में OBC सूची में शामिल की गई कई मुस्लिम उप-जातियां अब आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इस फैसले को राज्य की राजनीति में बड़ा और दूरगामी असर वाला कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने कहा है कि यह फैसला Calcutta High Court के मई 2024 में दिए गए आदेश के अनुपालन में लिया गया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य में केवल 7 प्रतिशत OBC आरक्षण ही वैध माना जाएगा और सिर्फ 66 मूल श्रेणियां ही आरक्षण की पात्र होंगी।
नई सरकार ने इसी आदेश को आधार बनाते हुए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा तैयार की गई विस्तारित OBC सूची को निरस्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि अब नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में केवल वही 66 श्रेणियां मान्य होंगी जिन्हें अदालत ने वैध माना है।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में OBC आरक्षण को OBC-A और OBC-B दो श्रेणियों में बांटा गया था। OBC-A के तहत 10 प्रतिशत और OBC-B के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान कई नई उप-जातियों को सूची में शामिल किया गया था, जिनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से जुड़ी बताई जाती रही।
विपक्ष लगातार इस व्यवस्था पर तुष्टिकरण और राजनीतिक लाभ के आरोप लगाता रहा था। बाद में इसी मुद्दे को अदालत में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने पुराने ढांचे को अवैध ठहराते हुए सीमित श्रेणियों को ही वैध माना।
नई सरकार के फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा इस फैसले को अदालत के आदेश का पालन और “वास्तविक पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा मान रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर पश्चिम बंगाल की सामाजिक संरचना, आरक्षण व्यवस्था और आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।