सूरजपुर जिले के नवगठित शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार भाजपा की जीत का भरोसा जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपने भीतर उठे असंतोष को शांत कर चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश तेज कर दी है। यही वजह है कि अब यह चुनाव सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है।
सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का शिवनंदनपुर चुनाव को लेकर दिया गया बयान काफी चर्चा में है। सीएम साय ने साफ कहा कि जनता भाजपा सरकार के कामकाज से संतुष्ट है और नगर पंचायत चुनाव में भी पार्टी को भारी समर्थन मिलेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का फायदा भाजपा को सीधे तौर पर चुनाव में मिलेगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल दिखाई देने लगा और पार्टी ने चुनाव प्रचार को और आक्रामक बना दिया।
लेकिन इसी बीच कांग्रेस ने भी बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए अपने बागी नेताओं को मनाने में सफलता हासिल कर ली। अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे बागी प्रत्याशी रामलाल सोनी और प्रभात जायसवाल ने आखिरकार अपना नामांकन वापस ले लिया। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व की लगातार बैठकों और समझाइश के बाद दोनों नेता आधिकारिक प्रत्याशी के समर्थन में तैयार हुए। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि बागियों के मैदान में बने रहने से वोटों का बंटवारा होने की आशंका थी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अब पार्टी पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतर चुकी है। जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने दावा किया कि शिवनंदनपुर क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है और यहां की जनता हमेशा कांग्रेस समर्थित नेतृत्व पर भरोसा जताती आई है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बनने के बाद भी लोगों का समर्थन कांग्रेस के साथ बना हुआ है और इस बार भी पार्टी मजबूती के साथ जीत दर्ज करेगी।
चुनाव के समीकरण अब और दिलचस्प हो गए हैं क्योंकि मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं रह गया है। आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही देखने को मिलेगी। दोनों दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है और इसी कारण प्रचार से लेकर रणनीति तक हर स्तर पर पूरी ताकत झोंकी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर भी चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। भाजपा विकास और सरकार की योजनाओं के दम पर वोट मांग रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय जनसमर्थन और पुराने संगठनात्मक आधार को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही है। ऐसे में अब शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव केवल एक सामान्य निकाय चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बनता दिखाई दे रहा है।
आने वाले दिनों में प्रचार और भी तेज होने की संभावना है। नेताओं की सभाएं, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदाताओं को साधने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री साय का भरोसा जनता के वोट में बदलता है या कांग्रेस की एकजुटता भाजपा की रणनीति पर भारी पड़ती है। फिलहाल शिवनंदनपुर का चुनावी रण पूरी तरह रोमांचक हो चुका है।