रूस और यूक्रेन के बीच बीते लंबे समय से चल रहे विनाशकारी युद्ध के मोर्चे से भारतीय नागरिकों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका की सुनवाई के दौरान आधिकारिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए जानकारी दी है कि इस युद्ध के दौरान अब तक कुल 49 भारतीय नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न माध्यमों और एजेंटों के झांसे में आकर अब तक कुल 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे। कोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार लगातार कूटनीतिक और रणनीतिक प्रयासों के जरिए इन नागरिकों की सुरक्षा और वतन वापसी सुनिश्चित करने में जुटी हुई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ कर रही है मामले की गंभीर सुनवाई
यह पूरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष चल रही है। यह मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारत से नौकरी और अच्छे भविष्य के नाम पर रूस गए 26 युवाओं को धोखे व जबरन तरीके से रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन के खिलाफ अग्रिम युद्ध के मोर्चों पर झोंक दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इन सभी फंसे हुए भारतीयों की तत्काल और सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए केंद्र को कड़े निर्देश देने की मांग की थी।
आकर्षक वेतन और रूसी नागरिकता के वादे से जाल में फंसे थे भारतीय युवा
अदालत के सामने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार की कूटनीतिक स्थिति को स्पष्ट किया। शुरुआती जांच और खुफिया इनपुट्स के हवाले से बताया गया कि कई भारतीय युवा आकर्षक मासिक वेतन, भारी साइनिंग बोनस और सबसे बढ़कर रूसी नागरिकता मिलने के लोक-लुभावन वादों से प्रभावित होकर वहां गए थे। एजेंटों के शातिर नेटवर्क ने उन्हें धोखे में रखकर रूसी सेना के साथ कड़े अनुबंध पर साइन करवा लिए थे।
- भर्ती के समय वित्तीय पैकेज: रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन युवाओं को भर्ती के वक्त करीब 5,000 डॉलर (लगभग 4.15 लाख) का साइनिंग बोनस और करीब 2,500 डॉलर (लगभग 2.07 लाख) मासिक वेतन देने का लालच दिया गया था।
- मुआवजे का प्रावधान: इसके साथ ही युद्ध में मौत होने की स्थिति में परिवार को करीब 1.68 लाख डॉलर (लगभग 1.40 करोड़) का भारी-भरकम मुआवजा देने का प्रस्ताव भी अनुबंध में शामिल था।
139 भारतीयों को कराया गया मुक्त, छह नागरिक अब भी लापता
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को सरकार द्वारा किए गए रेस्क्यू ऑपरेशंस की सफलता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास लगातार रूसी रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में है।
भारत के कड़े कूटनीतिक दबाव के चलते अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना के कड़े और बाध्यकारी अनुबंध से पूरी तरह मुक्त कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है। हालांकि, केंद्र ने यह भी स्वीकार किया कि याचिका में उल्लेखित 26 लोगों में से 14 की मौत हो चुकी है, जबकि 11 अन्य को रूसी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर “मिसिंग इन एक्शन” बताया है। वर्तमान में छह भारतीय नागरिक अब भी पूरी तरह लापता हैं, जबकि 23 अन्य लोगों की सही भौगोलिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शवों के मिलान के लिए 21 परिवारों के डीएनए नमूने भेजे गए मॉस्को
सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि लापता और मृत लोगों की शिनाख्त को पूरी प्राथमिकता दी जा रही है। युद्ध क्षेत्र से बरामद हो रहे अज्ञात शवों और पीड़ितों के मिलान व सटीक पहचान के लिए भारत सरकार ने अब तक 21 प्रभावित परिवारों के डीएनए (DNA) नमूने एकत्र कर मॉस्को भेज दिए हैं।
इसके अतिरिक्त, एक अन्य मामले में एक भारतीय नागरिक को छेड़छाड़ के एक गंभीर मामले में रूस की अदालत द्वारा आठ साल की सजा सुनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इन सभी मामलों को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर देखने और प्रभावित परिवारों को पल-पल की पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराते रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।