घर की बालकनी, टैरेस या गार्डन को खूबसूरत बनाने के लिए लोग तरह-तरह के पौधे लगाते हैं, लेकिन अपराजिता का पौधा अपनी अलग ही पहचान रखता है। नीले, सफेद और बैंगनी रंग के खूबसूरत फूलों वाला यह पौधा न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व के कारण भी काफी पसंद किया जाता है। अपराजिता को कम देखभाल वाला पौधा माना जाता है, इसलिए गार्डनिंग शुरू करने वाले लोग भी इसे आसानी से घर में लगा सकते हैं। अगर सही तरीके से इसकी प्लांटेशन और देखभाल की जाए तो यह पौधा तेजी से बढ़ता है और लंबे समय तक फूल देता है।
अपराजिता लगाने का सही समय
अपराजिता का पौधा गर्म और हल्के नम मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है। इसे फरवरी से जुलाई के बीच लगाना बेहतर माना जाता है। हालांकि सही देखभाल के साथ इसे साल के दूसरे मौसम में भी लगाया जा सकता है। यह पौधा धूप पसंद करता है, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहां रोज कम से कम 4 से 6 घंटे धूप आती हो।
बीज या कटिंग से कैसे लगाएं पौधा
अपराजिता का पौधा बीज और कटिंग दोनों तरीकों से लगाया जा सकता है। अगर बीज से पौधा लगा रहे हैं तो पहले बीज को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद गमले या मिट्टी में करीब 1 इंच गहराई में बीज डालें। कटिंग से लगाने के लिए स्वस्थ शाखा का छोटा हिस्सा काटकर मिट्टी में लगाएं। कुछ दिनों में नई जड़ें निकलने लगती हैं।
कैसी होनी चाहिए मिट्टी
अपराजिता के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। आप सामान्य मिट्टी में गोबर की खाद और थोड़ी रेत मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि गमले में पानी जमा न हो, क्योंकि ज्यादा नमी से जड़ें खराब हो सकती हैं।
पानी और खाद का रखें ध्यान
गर्मी में पौधे को रोज हल्का पानी देना चाहिए, जबकि सर्दियों में जरूरत के अनुसार पानी दें। मिट्टी पूरी तरह सूखने न दें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी डालने से भी बचें। हर 15 से 20 दिन में जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालने से पौधे की ग्रोथ अच्छी होती है और ज्यादा फूल आते हैं।
बेल को सहारा देना जरूरी
अपराजिता एक बेल वाला पौधा है, इसलिए इसे बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है। आप लकड़ी, जाली या रस्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पौधा तेजी से फैलता है और गार्डन ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है।
कीड़ों से बचाव कैसे करें
अगर पौधे की पत्तियों पर कीड़े दिखाई दें तो नीम के तेल का स्प्रे करें। यह नेचुरल तरीका पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना कीड़ों से बचाने में मदद करता है।