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48 घंटे में 3 आत्महत्याएं : गांव में पसरा मातम, ग्रामीणों ने जनजागरूकता अभियान की उठाई मांग

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कुरुद – पुलिस अनुविभाग कुरुद अंतर्गत मगरलोड थाना और करेली बड़ी चौकी क्षेत्र में बीते दो दिनों के भीतर तीन अलग-अलग आत्महत्या की घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है। समाज के लोग इसे मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और सामाजिक जागरूकता की कमी से जोड़कर देख रहे हैं।

छात्र ने समझाइश के बाद उठाया आत्मघाती कदम
पहला मामला मगरलोड थाना क्षेत्र के ग्राम कपालफोड़ी का है। यहां 11वीं कक्षा पास कर चुके 17 वर्षीय रामलखन साहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबिक 19 मई की सुबह दादा ने उसे पढ़ाई में ध्यान देने की समझाइश दी थी। इसके बाद वह पिता के साथ खेत में ट्रैक्टर से काम करने गया और दोपहर करीब ढाई बजे घर लौटा।

जब काफी देर तक वह खाना खाने बाहर नहीं आया, तब परिजनों ने कमरे में जाकर देखा। वहां रामलखन छत के हुक पर नायलॉन की रस्सी के सहारे फांसी पर लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू की। आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।

ईंट भट्ठा मजदूर महिला ने पेड़ पर लगाई फांसी
दूसरी घटना करेली बड़ी चौकी क्षेत्र के ग्राम परेवाडीही की है। मृतका गीता ध्रुव (42 वर्ष) अपने पति के साथ ग्राम भेण्डरी में खेत में ईंट बनाने का काम करती थी। बताया गया कि 19 मई की रात काम की जगह से करीब 500 मीटर दूर बुधराम निषाद के खेत में बबूल के पेड़ पर उसने बिजली के तार से फांसी लगा ली। प्रारंभिक जांच में अत्यधिक शराब सेवन और पारिवारिक विवाद को घटना की वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मानसिक तनाव से जूझ रही महिला ने भी दी जान
तीसरा मामला 21 मई को फिर ग्राम परेवाडीही से सामने आया। यहां तुलसी ध्रुव (43 वर्ष) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार मृतका पिछले कई महीनों से मानसिक तनाव और अस्वस्थता से जूझ रही थी। माना जा रहा है कि इसी कारण उसने यह कदम उठाया।

बढ़ती घटनाओं ने खड़े किए कई सवाल
लगातार सामने आ रही आत्महत्या की घटनाओं ने ग्रामीण समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और नशे जैसी समस्याओं को लेकर गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। लोगों ने प्रशासन और समाजसेवी संगठनों से काउंसलिंग एवं जनजागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की मांग की है।

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