धमतरी – उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यहां हिमालयन ट्राइकारिनेट हिल टर्टल एक अत्यंत दुर्लभ, संरक्षित और संवेदनशील प्रजाति की उपस्थिति पाई गई है। यह प्रजाति सामान्यतः हिमालय की तलहटी व पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में पाई जाती है, इसलिए इसका मध्य भारत में मिलना बेहद महत्वपूर्ण वैज्ञानिक घटना है। यह खोज USTR की पारिस्थितिक क्षमता और संरक्षण के सफल प्रयासों को रेखांकित करती है।
दुर्लभ कछुआ प्रजाति का महत्व
तीन धारियों वाला यह दुर्लभ कछुआ अपनी विशिष्ट संरचना, संवेदनशीलता और पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित उपस्थिति के लिए जाना जाता है। सीतानदी में इसका मिलना इस बात का प्रतीक है कि रिजर्व का जंगल न सिर्फ स्वस्थ है, बल्कि ऐसे वन्यजीवों के लिए भी अनुकूल बन चुका है, जिन्हें अत्यंत सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता होती है।
सीतानदी में हाल ही दर्ज हुई अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियाँ
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व पिछले कुछ वर्षों में जैव-विविधता के लिहाज़ से लगातार मजबूत होकर उभरा है। हाल में यहां मालाबार पाइड़ हॉर्नबिल, इंडियन जाइंट फ्लाइंग स्क्विरल, इंडियन जाइंट स्क्विरल और स्मूथ-कोटेड ऑटर जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की गई है। ये सभी प्रजातियाँ रिजर्व के घने जंगल, स्वस्थ नदी तंत्र और सुरक्षित वन्यजीव आवास की प्रतीक मानी जाती हैं।
संरक्षण प्रयासों के स्पष्ट परिणाम
सीतानदी की इस असाधारण खोज के पीछे वन विभाग का लगातार किया जा रहा वैज्ञानिक प्रबंधन, फील्ड स्टाफ की सक्रियता और स्थानीय समुदायों का संरक्षण सहयोग प्रमुख भूमिका निभाते हैं। बेहतर मॉनिटरिंग, मानवीय हस्तक्षेप में कमी, कैमरा ट्रैपिंग और आवास सुधार जैसे प्रयासों ने मिलकर रिजर्व को ऐसा अनुकूल वातावरण प्रदान किया है, जहां दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियाँ भी सहज रूप से फल-फूल रही हैं।