छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में होने जा रहे एक अनोखे “फेक मैरिज इवेंट” ने सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संगठनों तक हंगामा खड़ा कर दिया। भिलाई के करंजा गांव स्थित Koshi Resort में 30 मई को नकली शादी का आयोजन किया जाना था, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे मामले पर ब्रेक लगा दिया।
जानकारी के मुताबिक इस इवेंट का कॉन्सेप्ट बिल्कुल शादी जैसा तैयार किया गया था। इसमें शामिल होने वाले कपल्स से एंट्री फीस ली जा रही थी और उन्हें दूल्हा-दुल्हन की पारंपरिक ड्रेस पहनकर पहुंचने को कहा गया था। रिसॉर्ट में शादी जैसी सजावट, रस्मों और माहौल की तैयारी की जा रही थी ताकि लोग बिना असली शादी के “वेडिंग एक्सपीरियंस” का आनंद ले सकें।
सोशल मीडिया पर इस इवेंट का जमकर प्रचार किया जा रहा था। रील्स कल्चर और थीम पार्टी के अंदाज में तैयार किए गए इस आयोजन को लेकर युवाओं में उत्सुकता दिखाई दे रही थी। लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी धार्मिक संगठनों तक पहुंची, विवाद तेजी से बढ़ गया।
Hindu Yuva Manch समेत कई हिंदू संगठनों ने इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई। कार्यकर्ता जेवरा-सिरसा पुलिस चौकी पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों का कहना था कि हिंदू धर्म में विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं बल्कि पवित्र संस्कार माना जाता है और इसे मनोरंजन या थीम पार्टी की तरह पेश करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। कोशी रिसॉर्ट के मैनेजर ब्रह्मदत्त पांडेय को प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि इस इवेंट के मुख्य आयोजक फिलहाल सामने नहीं आए हैं और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के आयोजनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि सोशल मीडिया ट्रेंड्स और वायरल कॉन्सेप्ट के नाम पर धार्मिक परंपराओं का मजाक उड़ाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह मामला अब सिर्फ एक इवेंट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया संस्कृति, थीम पार्टी ट्रेंड और धार्मिक परंपराओं के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है। भिलाई में “फेक शादी” को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है।