देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को बड़ा झटका देते हुए 28% GST को पूरी तरह वैध ठहरा दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स द्वारा जमा की जाने वाली पूरी राशि पर टैक्स वसूला जा सकता है और यह संविधान के दायरे में पूरी तरह सही है।
सुप्रीम कोर्ट ने Delta Corp समेत कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कंपनियों ने पिछली तारीख से लागू किए गए 28% GST यानी रिट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी गतिविधियां GST कानून के तहत “एक्शनएबल क्लेम” की श्रेणी में आती हैं। इसलिए इन पर टैक्स लगाना पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक है। अदालत ने यह भी कहा कि टैक्स विभाग द्वारा जारी किए गए शो-कॉज नोटिस वैध हैं और GST अथॉरिटीज अब कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को भी बड़ी राहत देते हुए कहा कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें रेगुलेट करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चाहे किसी गेम में स्किल की जरूरत क्यों न हो, राज्य सरकारें उसे सार्वजनिक हित में बैन कर सकती हैं।
इसके साथ ही कोर्ट ने Tamil Nadu और Karnataka सरकारों की अपीलों को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को भी रद्द कर दिया, जिनमें राज्य सरकारों द्वारा ऑनलाइन गेमिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों को असंवैधानिक बताया गया था। कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत भी खत्म कर दी गई है।
हालांकि कोर्ट ने गेमिंग कंपनियों को राहत देते हुए यह कहा कि वे GST विभाग द्वारा जारी नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल कर सकती हैं और कानून के तहत अपना पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र हैं।
दरअसल, यह पूरा विवाद करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस को लेकर था। टैक्स विभाग का कहना था कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा जमा की जाने वाली पूरी रकम यानी “फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट” पर 28% GST देना होगा।
दूसरी तरफ गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल अपनी कमीशन आय यानी ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) पर टैक्स देना चाहिए। कंपनियों के मुताबिक, उनका वास्तविक राजस्व कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% तक ही होता है।
सुनवाई के दौरान कंपनियों ने यह भी कहा था कि अगर सरकार इतनी बड़ी GST वसूलेगी, तो कई कंपनियां बंद हो जाएंगी और हजारों नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इंडस्ट्री के मुताबिक टैक्स की मांग उनकी कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है।
इस बीच केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया ऑनलाइन गेमिंग कानून ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ यानी PROGA भी चर्चा में रहा। यह कानून उन ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है, जहां खिलाड़ी पैसे लगाकर जीत की उम्मीद करते हैं।
इस कानून के लागू होने के बाद देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ा। कई कंपनियों ने खर्च घटाने शुरू किए और 3,000 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर टैक्स और रेगुलेशन का दबाव और बढ़ सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई कंपनियों के बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।