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खाने-पीने से लेकर शैंपू तक सब होगा महंगा! कंपनियों पर बढ़ती लागत का दबाव

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आने वाले दिनों में आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाने-पीने के सामान, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और पैकेज्ड आइटम्स की कीमतों में तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। इसकी बड़ी वजह कच्चे माल और पैकेजिंग लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी है।

सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों पर इनपुट कॉस्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि कई कंपनियां पिछले एक से दो महीनों में अपने उत्पादों के दाम 3 से 7 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि रॉ मटीरियल की औसत लागत करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जिसका असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर दिखाई देगा।

महंगाई के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। अप्रैल में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई यानी फूड इन्फ्लेशन भी बढ़कर 4.20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि घरेलू बजट पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता पैकेजिंग मटीरियल और तेल की कीमतों को लेकर जताई गई है। शैंपू की बोतलों, डिटर्जेंट कंटेनरों और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले HDPE प्लास्टिक की कीमतें 56 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 32 प्रतिशत महंगा हो गया है। पाम ऑयल की कीमतों में भी 11 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।

कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती लागत के बावजूद उन्हें मुनाफा भी बनाए रखना है। ऐसे में कई कंपनियां केवल दाम बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि “ग्रामेज कट” यानी पैकेट का वजन कम करने का तरीका भी अपना सकती हैं। यानी ग्राहक को कीमत पहले जैसी दिखेगी, लेकिन पैकेट में मिलने वाला सामान कम हो जाएगा।

इकोनॉमिक्स की भाषा में इसे “श्रिंकफ्लेशन” कहा जाता है। कंपनियां ऐसा इसलिए करती हैं ताकि ग्राहक को सीधे तौर पर महंगाई का झटका महसूस न हो और उनका प्रॉफिट मार्जिन भी बचा रहे। आने वाले समय में बिस्किट, स्नैक्स, साबुन, शैंपू और दूसरे FMCG प्रोडक्ट्स में यह ट्रेंड और बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर कंपनियों के मुनाफे पर भी दिखाई देने लगा है। मार्च तिमाही में कई बड़ी कंपनियों का ग्रॉस मार्जिन घटा है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक यह दबाव और बढ़ सकता है।

हालांकि कंपनियां दाम बढ़ाकर नुकसान से बचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई का असर ग्राहकों की खरीद क्षमता पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले महीनों में सामान की कुल खपत यानी कंजम्पशन वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है।

यानि आने वाले समय में लोगों को वही सामान खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं, और कई प्रोडक्ट्स में कीमत तो वही रहेगी लेकिन पैकेट छोटा हो जाएगा।

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