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CBSE की कॉपी जांच पर उठे बड़े सवाल, छात्रों ने कहा- धुंधली स्कैन कॉपी और गायब पन्नों ने बिगाड़ा भविष्य

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सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद अब मूल्यांकन प्रक्रिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हजारों छात्र ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हें धुंधली स्कैन कॉपियां दी गईं, कई सप्लीमेंट्री पन्ने गायब हैं और कुछ मामलों में दूसरे छात्रों की कॉपियां जोड़ दी गईं। लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं मिलने से छात्र और अभिभावक दोनों परेशान हैं।

दरअसल, इस साल सीबीएसई ने 12वीं की कॉपियों की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से कराई थी। बोर्ड के मुताबिक करीब 98 लाख कॉपियों का मूल्यांकन डिजिटल तरीके से किया गया। लेकिन अब इसी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि अगर औसतन हर विद्यार्थी की कॉपी 35 से 40 पन्नों की रही होगी, तो करीब 40 करोड़ पन्नों को स्कैन किया गया होगा। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर स्कैनिंग और निगरानी में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सोशल मीडिया पर लगातार छात्र अपनी स्कैन कॉपियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कई कॉपियां इतनी धुंधली हैं कि लिखावट तक साफ नहीं दिखाई दे रही। कुछ छात्रों का कहना है कि उनकी सप्लीमेंट्री कॉपी के पन्ने ही गायब हैं, जबकि कुछ को अपनी जगह किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका मिल गई।

दिल्ली के छात्र देवांश खत्री ने आरोप लगाया कि अकाउंटेसी की उनकी 16 पन्नों की सप्लीमेंट्री कॉपी स्कैनिंग के दौरान गायब हो गई। देवांश को 12वीं में 89 प्रतिशत अंक मिले, लेकिन अकाउंटेसी में सिर्फ 60 नंबर आए। उनका दावा है कि उन्हें 75 से ज्यादा अंक मिलने चाहिए थे। जब उन्होंने स्कैन कॉपी मंगाई तो सप्लीमेंट्री के पूरे 16 पन्ने ही गायब मिले।

इसी तरह छात्र वेदांत ने दावा किया कि भौतिकी विषय में उन्हें किसी दूसरे छात्र की सप्लीमेंट्री कॉपी दिखाई गई। वहीं दिल्ली की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि अंग्रेजी की स्कैन कॉपी में सिर्फ पहला पन्ना उसका था, बाकी सभी पेज किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिका के थे। मामले को गंभीर मानते हुए अभिभावकों ने वकील के जरिए सीबीएसई को कानूनी नोटिस भी भेजा है।

दिल्ली की छात्रा शालिनी ने बताया कि उन्हें 80 प्रतिशत से ज्यादा अंकों की उम्मीद थी, लेकिन सिर्फ 58 प्रतिशत नंबर मिले। गणित में जहां उन्हें 75 अंक आने की उम्मीद थी, वहां केवल 51 अंक दिए गए। उन्होंने दावा किया कि गणित की स्कैन कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई और ईमेल करने के बावजूद सीबीएसई की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

सीबीएसई लगातार दावा कर रहा है कि छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही। अब तक 4 लाख से ज्यादा छात्र पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर चुके हैं, जबकि कई छात्र स्कैन कॉपी ही न मिलने के कारण आवेदन तक नहीं कर पाए हैं।

शिक्षा विशेषज्ञ भी इस पूरे मामले पर चिंता जता रहे हैं। कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष केशव अग्रवाल ने कहा कि 12वीं के नंबर छात्रों के भविष्य का आधार होते हैं, इसलिए सीबीएसई को जवाब देना चाहिए। वहीं एनसीईआरटी के पूर्व अध्यक्ष और शिक्षाविद् जेएस राजपूत ने कहा कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में कहीं गलती हुई है तो बोर्ड को तुरंत सुधार करना चाहिए।

अब यह मामला सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छात्रों के भविष्य और सीबीएसई की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। लाखों छात्र और अभिभावक इस उम्मीद में हैं कि बोर्ड जल्द पारदर्शी तरीके से जांच कर सही समाधान देगा।

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