शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग किसी भी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले सबसे पहले उसका P/E रेशियो देखते हैं। आम धारणा यही है कि कम P/E वाला शेयर सस्ता और ज्यादा P/E वाला शेयर महंगा होता है। लेकिन बाजार के अनुभवी निवेशक और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ इसी एक पैमाने के भरोसे निवेश करना कई बार बड़ी गलती साबित हो सकता है। आज के बदलते बाजार में कंपनियों की सही वैल्यू समझने के लिए PEG, P/B और P/S जैसे दूसरे वैल्यूएशन टूल्स भी उतने ही जरूरी हो गए हैं।
दरअसल कई ऐसी कंपनियां होती हैं जिनका P/E रेशियो काफी ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे वजह उनकी तेज ग्रोथ होती है। निवेशक भविष्य में कंपनी की बढ़ती कमाई को देखते हुए ज्यादा कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे मामलों में सिर्फ P/E देखकर शेयर को महंगा मान लेना सही फैसला नहीं होता। यहीं पर PEG रेशियो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रेशियो कंपनी की संभावित अर्निंग ग्रोथ को भी जोड़कर देखता है और बताता है कि कंपनी की मौजूदा कीमत उसकी भविष्य की कमाई के हिसाब से कितनी उचित है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी कंपनी का P/E ज्यादा है लेकिन उसकी कमाई तेजी से बढ़ रही है, तो वह शेयर वास्तव में उतना महंगा नहीं माना जाएगा जितना आंकड़ों में दिखाई देता है। यही कारण है कि ग्रोथ कंपनियों का विश्लेषण करते समय अनुभवी निवेशक PEG रेशियो को ज्यादा महत्व देते हैं।
वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों के लिए P/B यानी प्राइस-टू-बुक रेशियो ज्यादा उपयोगी माना जाता है। यह रेशियो कंपनी की बुक वैल्यू के मुकाबले उसके शेयर की कीमत को मापता है। बैंकिंग सेक्टर में कंपनी की संपत्ति और बैलेंस शीट बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए वहां P/E से ज्यादा P/B रेशियो सही तस्वीर दिखा सकता है।
इसके अलावा कई नई और घाटे में चल रही कंपनियों में P/E रेशियो बेकार हो जाता है क्योंकि उनकी कमाई निगेटिव होती है। ऐसी स्थिति में निवेशक P/S यानी प्राइस-टू-सेल्स रेशियो का सहारा लेते हैं। यह रेशियो बताता है कि निवेशक कंपनी की हर 1 रुपये की बिक्री के लिए कितनी कीमत चुकाने को तैयार हैं। खासतौर पर स्टार्टअप और तेजी से बढ़ती टेक कंपनियों में यह रेशियो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ कहते हैं कि सिर्फ ज्यादा बिक्री होना सफलता की गारंटी नहीं होती। किसी भी कंपनी को लंबे समय तक टिके रहने के लिए अंततः मुनाफा कमाना ही पड़ता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ एक आंकड़े के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी की ग्रोथ, मुनाफा, बैलेंस शीट, कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को भी साथ में समझना चाहिए।
शेयर बाजार में सफल निवेश का सबसे बड़ा नियम यही माना जाता है कि कोई भी एक रेशियो पूरी कहानी नहीं बताता। समझदार निवेशक अलग-अलग वैल्यूएशन टूल्स को मिलाकर कंपनी की असली ताकत पहचानते हैं और उसी आधार पर निवेश का फैसला लेते हैं।