Hindware और Google के बीच चल रहे चर्चित ट्रेडमार्क विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि किसी कंपनी के ट्रेडमार्क वाले नाम को Google Ads में कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल कर प्रतिस्पर्धी ब्रांड का विज्ञापन दिखाना ट्रेडमार्क उल्लंघन माना जा सकता है।
यह मामला तब सामने आया जब लोग गूगल पर Hindware सर्च कर रहे थे, लेकिन सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर प्रतिस्पर्धी कंपनियों Cera और Grohe के विज्ञापन दिखाई दे रहे थे। इससे कई ग्राहक Hindware की वेबसाइट पर जाने के बजाय दूसरी कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर पहुंच रहे थे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अगर कोई कंपनी Google AdWords या Google Ads के जरिए किसी दूसरे ब्रांड का नाम कीवर्ड के तौर पर खरीदकर अपना विज्ञापन दिखाती है, तो यह ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन हो सकता है।
दरअसल डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में “कीवर्ड” सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। कंपनियां अक्सर अपने प्रतिद्वंद्वी ब्रांड के नाम पर विज्ञापन चलाकर उनके ऑर्गेनिक ट्रैफिक को अपनी वेबसाइट की तरफ मोड़ने की कोशिश करती हैं। Hindware केस में भी यही हुआ था।
इसे आसान भाषा में समझें तो अगर कोई व्यक्ति पानी खरीदने के लिए Bisleri सर्च करे और उसे किसी दूसरी कंपनी का विज्ञापन दिख जाए, तो ग्राहक भ्रमित होकर दूसरी वेबसाइट पर जा सकता है। इसी तरह गोंद के लिए Fevicol और सैनिटरीवेयर में Hindware जैसे नाम अपने-आप में एक मजबूत डिजिटल पहचान बन चुके हैं।
कोर्ट के इस फैसले को भारत के डिजिटल विज्ञापन और SEO इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अब कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धी ब्रांड के नाम का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ट्रैफिक हासिल करना आसान नहीं रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों, ई-कॉमर्स कंपनियों और ब्रांड्स की विज्ञापन रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है। अब कंपनियों को Google Ads कैंपेन चलाते समय ट्रेडमार्क नियमों का ज्यादा ध्यान रखना होगा।
यह मामला सिर्फ Hindware तक सीमित नहीं है। भारत में लगभग हर बड़ी इंडस्ट्री में इस तरह की रणनीति का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जहां कंपनियां प्रतिद्वंद्वी ब्रांड के नाम पर विज्ञापन खरीदकर ग्राहकों को अपनी वेबसाइट की ओर खींचने की कोशिश करती हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब डिजिटल विज्ञापन की दुनिया में ट्रेडमार्क सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में कई बड़े ब्रांड्स अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।