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बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का पोर्टल हैक, पेपर-लीक की आशंका:परीक्षा से पहले छात्रों को प्रश्नपत्र मिलने का दावा, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कर रही जांच

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देशभर में चर्चित रहे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पेपर लीक का मामला अभी विवादों में है। छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी का समर्थ पोर्टल हैक हो गया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि क्वेश्चन पेपर भी लीक हुए हैं। यूनिवर्सिटी में यूजी-पीजी समेत कई विभागों की सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। इस बीच दावा किया गया है कि, एग्जाम से पहले छात्रों को वो क्वेश्चन पेपर मिले, जो एग्जाम में आए प्रश्नपत्र से मिल रहे थे। साथ ही पोर्टल हैक होने से स्टूडेंट्स के निजी डेटा लीक होने की बात भी सामने आई है। इसकी जानकारी मिलने पर प्रबंधन ने शुक्रवार को रातों रात बैठक बुलाई, जिसके बाद जांच के लिए 5 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है। कमेटी से 7 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है।

प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता सबूत नहीं – यूनिवर्सिटी प्रबंधन

दावा यह भी किया गया है कि, हैकर्स ने एग्जाम सहित प्रशासनिक कामकाज से जुड़ा डाटा लीक कर दिया है। यूनिवर्सिटी में करीब 32 डिपार्टमेंट के प्रश्नपत्र और अन्य पढ़ाई से जुड़े गोपनीय डॉक्यूमेंट प्रभावित हो सकते हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने शुक्रवार (29 मई) शाम अधिकारियों की बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा की। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि अभी तक प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। पोर्टल हैक कब हुआ ये भी जांच के बाद सामने आएगा।

पहले जानिए क्या है समर्थ पोर्टल ?

समर्थ पोर्टल का इस्तेमाल एडमिशन प्रोसेस, परीक्षा प्रबंधन, स्टूडेंट्स के डॉक्यूमेंट, प्रशासनिक रिकॉर्ड, शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि डेटा सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक होती है, तो हजारों विद्यार्थियों की निजी जानकारी प्रभावित हो सकती है।

पोर्टल पर आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और शैक्षणिक दस्तावेज जैसी संवेदनशील जानकारियां अपलोड रहती हैं। फिलहाल संबंधित संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों से प्रबंधन चर्चा कर इस पर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता

समर्थ पोर्टल हैक होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि, परीक्षा और प्रवेश से जुड़ी लगभग सभी महत्वपूर्ण जानकारियां इसी पोर्टल पर उपलब्ध रहती हैं। ऐसे में लॉगिन डिटेल्स सार्वजनिक होने से डेटा के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।

कई छात्रों ने मामले की निष्पक्ष जांच और पोर्टल की साइबर सुरक्षा मजबूत करने की मांग उठाई है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर पोर्टल कैसे हैक हुआ।

एग्जाम से पहले स्टूडेंट्स को मिले प्रश्नपत्र

बताया जा रहा है कि, सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एग्जाम से पहले ही कुछ स्टूडेंट्स तक प्रश्नपत्र पहुंच गए थे। दावा किया जा रहा है कि क्वेश्चन पेपर हुबहू थे, जिसकी वजह से पेपर लीक होने की बात कही जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र यूनिवर्सिटी प्रबंधन को दिया है।

लेकिन, यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रश्नपत्र ओरिजनल है या फिर बनावटी। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि अभी तक प्रश्नपत्र लीक होने के सबूत नहीं मिले हैं। बस समर्थ पोर्टल को हैक करने की बात सामने आई है।

जांच के लिए बनाई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर को बताया कि, इसकी समीक्षा के लिए रात में अफसरों की बैठक बुलाई गई।

जिसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें अफसरों के साथ ही विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

कमेटी को 7 दिन में रिपोर्ट पेश करना है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि पोर्टल आखिर कैसे हैक हुआ।

परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

32 विभागों के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले प्रभावित होने की आशंका ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह मामला सही साबित होता है, तो यह प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। हालांकि मामले में जांच जारी है।

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