छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रसव के दौरान उपयोग होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सहित दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं को अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) और मिथ्याछाप घोषित किया है। विभाग ने संबंधित बैच की दवाओं के भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) और राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। विभागीय जानकारी के अनुसार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आईपी 5 एमएल के बैच नंबर 1-7881 को जांच में गंभीर रूप से अवमानक पाया गया। वहीं रायपुर की कालीबाड़ी स्थित खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में दर्द और बुखार की चार अन्य दवाओं के नमूने भी गुणवत्ता मानकों में फेल मिले।
इन दवाओं को घोषित किया गया अवमानक
जांच में हरिद्वार की मैटिन्स हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की नाक्पैन-पी (बैच एमटी-250777), हर्सुलिया स्थित एनोन फार्मास्युटिकल की फ्लामो स्टार-एपी हिमाचल प्रदेश के सोलन की एलवी लाइफसाइंसेज की एसीएचई पी (बैच एलवी25डीटी-066बी) तथा नालागढ़ स्थित गो-ईश रेमेडीज लिमिटेड की कोल्ड जिया टैबलेट्स को अवमानक पाया गया।
साइड इफेक्ट पर यहां करें शिकायत
एफडीए ने दवा विक्रेताओं और अस्पतालों से स्टॉक की जांच करने तथा संबंधित बैच मिलने पर तत्काल सूचना देने को कहा है। आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है। किसी दवा के सेवन के बाद साइड इफेक्ट या गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
मेडिकल स्टोर्स व अस्पतालों में होगी जांच
नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ ने सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों में सघन जांच कर संबंधित दवाओं का स्टॉक जब्त करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन बैच की दवाओं की बिक्री और उपयोग पूरी तरह बंद किया जाए।
पहले भी फेल, नकली सैंपल का छत्तीसगढ़ कनेक्शन भी
छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की सितंबर 2025 की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट में देशभर की 112 दवाओं के नमूने फेल पाए गए थे, जबकि एक दवा नकली मिली थी। इस सूची में छत्तीसगढ़ में निर्मित या सप्लाई की गई 10 दवाएं शामिल थीं। खास बात यह रही कि नकली पाई गई एकमात्र दवा का संबंध भी छत्तीसगढ़ से था। बच्चों को कृमिनाशक के रूप में दी जाने वाली एल्बेंडाजोल टैबलेट के चार बैच गुणवत्ता जांच में फेल मिले थे। ये बैच जनवरी 2025 में तैयार होकर बाजार और सरकारी अस्पतालों तक पहुंचे थे।
जांच रिपोर्ट आने के करीब पांच माह बाद जनवरी 2026 में इनके उपयोग पर रोक लगाई गई। बाद में सीजीएमएससी ने भी संबंधित बैच वापस मंगाए थे। सर्दी-खांसी और बैक्टीरियल संक्रमण में उपयोग होने वाली एमोक्सिसिलिन टैबलेट में सक्रिय तत्व निर्धारित मानक से कम पाए गए, जिसके कारण वह गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई। यह दवा नवंबर 2024 में सप्लाई की गई थी। फंगल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेटामेथासोन, नियोमाइसिन और माइकोनाजोल युक्त क्रीम नकली पाई गई थी। संबंधित निर्माता के पास वैध लाइसेंस नहीं था और उसने दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का उपयोग किया था।