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छत्तीसगढ़ में लोक सेवा की गारंटी : पांच दिनों में मिलेगा शराब ट्रांसपोर्ट का परमिट और गरीबी का प्रमाणपत्र देंगे 15 दिनों में

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रायपुर – छत्तीसगढ़ में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अगर शराब कंपनी को शराब के परिवहन के लिए लाइसेंस लेना है, तो इस बात की गारंटी है कि यह काम पांच दिनों में हो जाएगा। लेकिन अगर किसी गरीब को गरीब होने यानी ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र चाहिए तो सरकार इस सेवा के लिए पूरे 15 दिन का समय लेगी।

राज्य सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत दो विभागों वाणिज्यिक कर (आबकारी विभाग) और राजस्व विभाग में सेवाएं देने के लिए समय सीमा तय की है। इस बदलाव के तहत तय किया गया है कि किस सेवा के लिए कितने दिन लगेंगे।

जवाबदेही और अपील प्रक्रिया
इन सेवाओं को समय पर प्रदान करने के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी गई है। प्रत्येक सेवा के लिए लोक प्राधिकारी, सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के पदनाम तय किए गए हैं, ताकि सेवा में देरी होने पर नागरिक उचित स्तर पर अपील कर सके।

गरीब होने का प्रमाणपत्र मिलेगा 15 दिनों में
लोक सेवा में गारंटी का एक और बदलाव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में किया गया है। यहां अलग-अलग तरह की सेवाओं के लिए समय सीमा तय की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लुएस) प्रमाणपत्र-15 कार्य दिवस में मिलेगा, प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति हेतु आर्थिक सहायता- 15 कार्य दिवस, सड़क दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर
घायल होने पर आर्थिक सहायता- 15 कार्य दिवस। नया साहूकारी (मनी लैंडिंग) लाइसेंस – 7 कार्य दिवस साहूकारी लाइसेंस का नवीनीकरण-07 कार्य दिवस केंद्रीय जाति प्रमाणपत्र जारी करना-7 कार्य दिवस में बनाकर दिया जाएगा।

शराब परिवहन के लिए पांच दिन…
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के पालन में राज्य सरकार ने वाणिज्यक कर (आबकारी विभाग) द्वारा शराब परिवहन के लिए दिए जाने वाले ट्रांसपोर्ट परमिट के लिए पांच दिन की समय सीमा रखी है। यानि शराब के थोक परिवहन और वेयर हाउस से शराब दुकानों तक माल पंहुचाने के लिए समय सीमा तय कीगई है। एफएल 16 (क) परिवहन अनुज्ञा पत्र 5 कार्य दिवस, सी.एस. 6 (ख) परिवहन अनुज्ञा पत्र भी 5 कार्य दिवस में मिलेगा। इन सेवाओं के लिए संबंधित जिले के प्रभारी आबकारी अधिकारी को उत्तरदायी पदाभिहित अधिकारी और सक्षम अधिकारी’ नियुक्त किया गया है। यदि इन सेवाओं के प्रदान करने में निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं होता है या कोई समस्या आती है, तो संबंधित जिले के कलेक्टर अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

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