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छत्तीसगढ़ में महामाया धान बीज की कमी से किसान परेशान, बोनी-रोपाई पर संकट के आसार

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Chhattisgarh में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को महामाया धान बीज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों और बीज केंद्रों में मांग के मुताबिक बीज उपलब्ध नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। समय पर बीज नहीं मिलने से धान की बोनी और रोपाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य के कई धान उत्पादक जिलों से बीज की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। Rajnandgaon, Dhamtari, Kabirdham समेत कई इलाकों में किसान महामाया धान बीज नहीं मिलने से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों में लोकप्रिय किस्मों की मांग ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति सीमित होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

हालांकि Raipur और Durg में कृषि विभाग पर्याप्त बीज उपलब्ध होने का दावा कर रहा है, लेकिन किसानों का आरोप है कि मांग के मुकाबले बीज की मात्रा काफी कम है। खासकर महामाया, राजेश्वरी और एमटीयू-1010 जैसी लोकप्रिय धान किस्मों की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सिंचित क्षेत्रों में मध्यम अवधि वाली किस्मों की मांग अधिक रहती है, जबकि वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल्दी पकने वाली किस्मों को किसान प्राथमिकता देते हैं। इसी वजह से कुछ समितियों में अस्थायी कमी की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 सीजन के लिए राज्य में करीब 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज की मांग दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले लगभग 4.87 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है। धान बीज के लिए 1 लाख 68 हजार 626 क्विंटल स्टॉक रखा गया था, जिसमें से अब तक 18 हजार 752 क्विंटल बीज वितरित किया जा चुका है। फिलहाल समितियों में करीब 1 लाख 49 हजार 513 क्विंटल बीज शेष बताया जा रहा है।

किसानों ने कृषि विभाग और राज्य सरकार से जल्द अतिरिक्त बीज उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि समय पर बोनी और रोपाई का काम पूरा किया जा सके। किसानों का कहना है कि यदि बीज संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो खरीफ उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

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