छत्तीसगढ़ अब देश के बड़े जेम्स और ज्वेलरी कारोबार केंद्रों की सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने राजधानी रायपुर में अत्याधुनिक जेम्स एवं ज्वेलरी पार्क विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुंबई, सूरत और कोलकाता के बाद यह देश का चौथा बड़ा जेम एंड ज्वेलरी पार्क होगा, जिससे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
राजधानी रायपुर के पंडरी क्षेत्र में करीब 9.616 एकड़ भूमि पर यह विशाल परियोजना विकसित की जाएगी। राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की पहल पर बनने वाला यह पार्क पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर तैयार होगा। परियोजना को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली PPP एप्रेजल कमेटी से मंजूरी भी मिल चुकी है। इस परियोजना की लीज अवधि 30 वर्ष तय की गई है, जिसे नवीनीकरण के साथ कुल 90 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
सरकार इस पार्क को केवल सराफा कारोबार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के पहले “वेडिंग डेस्टिनेशन मॉल” के रूप में भी विकसित करने की तैयारी है। यानी यहां सिर्फ सोना-चांदी और डायमंड ज्वेलरी का कारोबार ही नहीं होगा, बल्कि शादी से जुड़ी लगभग हर सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
परियोजना के तहत करीब 3.5 लाख वर्गफुट क्षेत्र विशेष रूप से जेम्स एवं ज्वेलरी व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, आयातकों-निर्यातकों और वर्कशॉप उपयोगकर्ताओं के लिए आरक्षित रहेगा। यहां आधुनिक शोरूम, थोक कार्यालय, सुरक्षित वर्कशॉप, सम्मेलन कक्ष और प्रदर्शनी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। पूरे परिसर में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इतना ही नहीं, पार्क में बीआईएस और हॉलमार्किंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे ताकि ज्वेलरी की गुणवत्ता और उपभोक्ता विश्वास दोनों को मजबूत किया जा सके। इसके अलावा बैंकिंग सुविधा, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास संस्थान और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं भी यहां विकसित की जाएंगी।
परियोजना का एक बड़ा आकर्षण इसका “वेडिंग डेस्टिनेशन मॉल” कॉन्सेप्ट है। शेष उपलब्ध क्षेत्र में डेवलपर को वाणिज्यिक और मनोरंजन गतिविधियां विकसित करने की छूट दी गई है। इसके तहत परिधान, फोटोग्राफी, फ्लावर डेकोरेशन, विवाह आयोजन और शादी से जुड़े अन्य कारोबारों के लिए भी अलग स्पेस तैयार किया जाएगा। यानी लोग एक ही जगह शादी की खरीदारी से लेकर आयोजन तक की लगभग सभी सुविधाएं पा सकेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में निवेश और व्यापार को नई गति मिलेगी। साथ ही हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे। स्थानीय कारीगरों, डिजाइनरों और छोटे व्यापारियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने इसे छत्तीसगढ़ के सराफा उद्योग के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कई वर्षों से लंबित थी और अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार कौशल विकास, बीआईएस प्रमाणन और हॉलमार्किंग जैसी सुविधाओं से प्रदेश के ज्वेलरी उद्योग की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आएगा।
फिलहाल परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। सीएसआईडीसी द्वारा 24 अप्रैल को आरएफपी जारी किया गया था और 15 मई तक बोलियां प्राप्त की गईं। अब तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सफल बोलीदाता का चयन कर परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा।
अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में रायपुर न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि मध्य भारत का बड़ा जेम्स एवं ज्वेलरी व्यापार केंद्र बन सकता है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।