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भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ, 10.2 एमटीपीए विस्तार परियोजना के लिए वेंडर मीट सम्मेलन आयोजित

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सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की उत्पादन क्षमता को वर्तमान 6.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़ाकर 10.2 एमटीपीए करने की प्रस्तावित विस्तार परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु बीएसपी के परियोजना विभाग द्वारा 03 जून 2026 को भिलाई निवास में दो दिवसीय विक्रेता सहयोग सम्मेलन (वेंडर मीट) ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ किया गया। “भविष्य के विस्तार हेतु सहभागिता का सुदृढ़ निर्माण” विषय पर आधारित यह सम्मेलन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, ईपीसी एजेंसियों, सलाहकारों, उपकरण निर्माताओं, सेवा भागीदारों तथा परियोजना हितधारकों के बीच समन्वित सहयोग को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक प्रभारी (भिलाई इस्पात संयंत्र) श्री चित्त रंजन महापात्र ने किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) श्री ए.के. चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री पी.के. सरकार, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) श्री अरुण कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, कार्यवाहक कार्यपालक निदेशक (खदान) श्री आर.बी. गहरवार, व मुख्य महाप्रबंधकों सहित सेल निगमित कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारीगण, विभागाध्यक्ष, एवं संयंत्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर की 100 से अधिक विक्रेता कंपनियों के 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

अपने संबोधन में निदेशक प्रभारी (भिलाई इस्पात संयंत्र) श्री चित्त रंजन महापात्र ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2030-31 तक देश की इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके अनुरूप देश के प्रमुख इस्पात उत्पादक व्यापक विस्तार पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेल ने वर्ष 2030 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 35 मिलियन टन तक बढ़ाने की परिकल्पना की है, जिसमें भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता को 6.8 एमटीपीए से बढ़ाकर 10.2 एमटीपीए करना एक महत्वपूर्ण घटक है।

उन्होंने कहा कि भारत की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था से इस्पात की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि कर रही हैं, जिससे इस्पात उद्योग के लिए व्यापक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने विस्तार परियोजना के क्रियान्वयन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रणालियों तथा सुरक्षित कार्य-पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्ववर्ती विस्तार परियोजनाओं से प्राप्त अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करते हुए आगामी परियोजना को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से सम्मेलन के दौरान उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचारी कार्यान्वयन पद्धतियों, लॉजिस्टिक्स अनुकूलन तथा सहयोगात्मक समाधानों पर सार्थक विचार-विमर्श करने का भी आग्रह किया, जिससे परियोजना का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री पी.के. सरकार ने ‘समन्वय-2026’ की अवधारणा, उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीएसपी की प्रस्तावित क्षमता वृद्धि केवल इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से ही संभव नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सभी हितधारकों के मध्य निर्बाध समन्वय भी आवश्यक है। उन्होंने उपलब्ध सर्वोत्तम संसाधनों, सेवाओं एवं विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर बल देते हुए विक्रेताओं और सहयोगी संस्थाओं से इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। श्री सरकार ने प्रतिभागियों से इस मंच का उपयोग सीखने, अनुभव साझा करने तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए करने का आग्रह किया, ताकि विस्तार परियोजना के लिए एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की जा सके।

उद्घाटन सत्र का संचालन उप महाप्रबंधक (परियोजनाएं) श्री अभिषेक श्रीवास्तव एवं सहायक महाप्रबंधक (परियोजनाएं) सुश्री जया तिवारी ने किया।

बीएसपी की विस्तार परियोजना के लिए आवश्यक तकनीकी, लॉजिस्टिक एवं रणनीतिक समन्वय को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में छह प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इनमें 3.44 एमटीपीए कच्चे इस्पात क्षमता विस्तार के अंतर्गत प्रस्तावित प्रमुख तकनीकी सुविधाएं, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण एवं कमीशनिंग गतिविधियों को समाहित करने वाली समग्र परियोजना कार्ययोजना, बहु-विषयक विक्रेताओं के मध्य सहयोगात्मक सहभागिता सत्र, मानकीकरण एवं गुणवत्ता अनुपालन, आपूर्ति श्रृंखला एवं लॉजिस्टिक्स एकीकरण तथा परियोजना नेतृत्व एवं विषय विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष तकनीकी संवाद शामिल हैं।

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