छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर के जमीन कारोबारी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई और अवैध रूप से प्राप्त राशि को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
ईडी के अनुसार जय प्रकाश गांधी और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर ऐसी जमीनों को खरीदा जो राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आ रही थीं। इसके बाद जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिक मुआवजा प्राप्त किया जा सके। जांच में सामने आया है कि लगभग 56 लाख 76 हजार रुपए के वास्तविक मुआवजे वाली जमीन पर करीब 9 करोड़ 83 लाख रुपए का भुगतान हासिल किया गया।
एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश रची। जमीन को 500 वर्गमीटर से कम के टुकड़ों में विभाजित करने के बाद मुआवजा नियमों का कथित दुरुपयोग किया गया, जिससे करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान हासिल किया गया। ईडी के मुताबिक इस तरीके से लगभग 9 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध आय अर्जित की गई।
मामले की जांच छत्तीसगढ़ एसीबी और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह पूरा मामला रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान ईडी ने अप्रैल 2026 में रायपुर, अभनपुर और धमतरी के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से प्राप्त धन को छिपाने और वैध दिखाने के लिए विभिन्न निवेश माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि रकम को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय योजनाओं में लगाया गया, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इसी आधार पर ईडी ने आरोपी के खिलाफ पीएमएलए के तहत कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी के बाद जय प्रकाश गांधी को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को पूछताछ के लिए रिमांड मिली है। एजेंसी अब इस पूरे मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच में सामने आया है कि भारतमाला परियोजना के तहत अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीनों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया। आरोप है कि करीब 80 नए नाम रिकॉर्ड में जोड़कर मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। राजस्व विभाग के अनुसार जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपए होना चाहिए था, वह बढ़कर 70 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच गया।
इस मामले में पहले भी कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और निगम आयुक्त निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। आरोप है कि राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने फर्जी दस्तावेजों और बैकडेट एंट्री के जरिए करोड़ों रुपए के मुआवजे का खेल किया।
भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना है, जिसके तहत देशभर में हजारों किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर इसी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन छत्तीसगढ़ में सामने आए इस कथित घोटाले ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल ईडी की जांच जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले से किन-किन लोगों को लाभ पहुंचा और करोड़ों रुपए की राशि आखिर कहां-कहां निवेश की गई।