पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक संकट का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। रायपुर सहित देश के कई शहरों में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कारोबारियों के अनुसार ईरान और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई प्रमुख ड्राई फ्रूट्स के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कीमतों में वृद्धि के चलते उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी असर पड़ रहा है।
ड्राई फ्रूट्स कारोबारियों का कहना है कि दिल्ली सहित देश के बड़े थोक बाजारों में पहले से मौजूद स्टॉक के सहारे कुछ समय तक स्थिति सामान्य बनी रही, लेकिन अब वह स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। नई खेप की आवक कम होने और वैकल्पिक मार्गों से माल आने के कारण लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
सबसे ज्यादा असर ईरान से आने वाले मामरा बादाम और पिस्ता पर पड़ा है। बाजार में बड़ी क्वालिटी वाले मामरा बादाम के दाम थोक में 4200 रुपये प्रति किलो से अधिक पहुंच गए हैं, जबकि कुछ समय पहले यही बादाम करीब 3500 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। खुदरा बाजार में इसकी कीमत साढ़े चार हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। वहीं ईरानी पिस्ता के दाम भी 3000 रुपये प्रति किलो के पार निकल गए हैं।
व्यापारियों के मुताबिक, ईरान से आने वाले मध्यम आकार के मामरा बादाम की कीमत भी 2200-2600 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2600-3000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। दूसरी ओर अफगानिस्तान से आने वाले बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट्स के दामों में भी तेजी देखी जा रही है।
काजू और किशमिश के दामों में भी लगातार मजबूती बनी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले वर्ष अंगूर की फसल प्रभावित होने के कारण किशमिश की उपलब्धता कम रही, जिसका असर अब तक बना हुआ है। पहले जो किशमिश थोक बाजार में 225 से 250 रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर लगभग 430 रुपये प्रति किलो हो गई है। खुदरा बाजार में यही किशमिश 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
हरी किशमिश की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले 500 रुपये प्रति किलो बिकने वाली हरी किशमिश अब 700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि खुदरा बाजार में इसके दाम 800 रुपये प्रति किलो तक देखे जा रहे हैं।
काजू की कीमतों में भी तेजी का रुख बना हुआ है। काजू के बीजों की कमी और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण थोक बाजार में इसकी कीमत 700 रुपये से लेकर 1700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। खुदरा बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले काजू 800 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो आने वाले समय में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल त्योहारी सीजन नहीं होने के कारण मांग सीमित है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स की सालभर रहने वाली खपत के चलते बाजार में कीमतों का दबाव बना हुआ है।
रायपुर के कारोबारियों का कहना है कि उपभोक्ता अभी जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन यदि कीमतों में और वृद्धि हुई तो मांग पर इसका और असर पड़ सकता है। फिलहाल ड्राई फ्रूट्स बाजार में वैश्विक घटनाओं का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है और इसका बोझ आखिरकार आम ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।