तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai ने भाजपा छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अन्नामलाई ने कहा कि उनकी नई पार्टी तमिलनाडु में 2031 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी और राज्य की राजनीति में एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में उभरेगी।
अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें यह तय करना मुश्किल लगने लगा कि वे भाजपा के साथ बने रहें या तमिलनाडु और तमिल समाज से जुड़े अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक रुकने का अनुरोध किया था।
गौरतलब है कि अन्नामलाई ने 2 जून को भाजपा से इस्तीफा दिया था, हालांकि उनका इस्तीफा पत्र बाद में सार्वजनिक हुआ। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि पिछले करीब 18 महीनों से पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद चल रहे थे। उनके अनुसार तमिलनाडु में राजनीति करने और संगठन को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर उनकी सोच और पार्टी नेतृत्व की रणनीति में अंतर बढ़ता जा रहा था।
अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में यह भी लिखा कि वे प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और दृष्टिकोण से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हुए थे। उनका उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाना और राज्य में नई राजनीतिक संस्कृति विकसित करना था। उन्होंने भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने एक अपेक्षाकृत युवा और अनुभवहीन व्यक्ति पर भरोसा कर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने 25 अगस्त 2020 को भाजपा का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें तमिलनाडु भाजपा का उपाध्यक्ष बनाया गया और 2021 में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उन्होंने राज्यभर में संगठन विस्तार के लिए कई अभियान चलाए और ‘एन मन्न, एन मक्कल’ यात्रा के जरिए व्यापक जनसंपर्क किया।
हालांकि चुनावी सफलता के मामले में भाजपा को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। अन्नामलाई के नेतृत्व में भाजपा ने 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन पार्टी के वोट प्रतिशत में सीमित बढ़ोतरी ही दर्ज हुई। हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा केवल एक सीट जीत सकी, जबकि अभिनेता Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें हासिल कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई के भाजपा छोड़ने से पार्टी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में वे तमिलनाडु में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे। सोशल मीडिया, युवा मतदाताओं और शहरी वर्ग के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनके अलग होने से भाजपा की युवा समर्थकों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा का वोट बैंक पूरी तरह किसी एक नेता पर निर्भर नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मौजूदगी अब भी उसके लिए मजबूत आधार बनी हुई है। साथ ही यदि भाजपा को क्षेत्रीय सहयोगी दलों का समर्थन मिलता रहा, तो संगठनात्मक नुकसान की भरपाई संभव हो सकती है।
अब तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अन्नामलाई की नई पार्टी कितना प्रभाव छोड़ पाएगी। क्या वह खुद को राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकतों के विकल्प के रूप में स्थापित कर पाएंगे, या फिर यह प्रयास भी तमिलनाडु की जटिल राजनीतिक संरचना में सीमित रह जाएगा? इसका जवाब आने वाले वर्षों में ही मिल सकेगा। फिलहाल इतना तय है कि अन्नामलाई की नई राजनीतिक पारी ने तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा और नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है।