देशभर में जीएसटी संग्रह की रफ्तार धीमी पड़ने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने आर्थिक मोर्चे पर एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। मई 2026 में जहां राष्ट्रीय स्तर पर कर संग्रह की वृद्धि दर में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, वहीं उत्तर प्रदेश ने अपने कुल जीएसटी संग्रह में 13 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हासिल कर बड़े राज्यों के बीच नया रिकॉर्ड कायम किया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में उत्तर प्रदेश का कुल जीएसटी संग्रह बढ़कर 8,728 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। आर्थिक चुनौतियों और कर संग्रह में सुस्ती के बावजूद प्रदेश का यह प्रदर्शन उसे देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते बड़े राज्यों की श्रेणी में खड़ा करता है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी अवधि में कई अन्य राज्यों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में 15 प्रतिशत, राजस्थान में 11 प्रतिशत, बिहार में 7 प्रतिशत और उत्तराखंड में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे माहौल में उत्तर प्रदेश का दो अंकों की वृद्धि दर हासिल करना राज्य की कर प्रणाली और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाता है।
राज्य के हिस्से के कर यानी एसजीएसटी (SGST) संग्रह में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। मई 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश का एसजीएसटी संग्रह 3,070 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि दर कई औद्योगिक और विकसित राज्यों से बेहतर मानी जा रही है।
हालांकि कुल कर संग्रह के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्य अभी भी आगे हैं, लेकिन वृद्धि दर के आधार पर उत्तर प्रदेश ने इन राज्यों को पीछे छोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियां, निवेश, व्यापारिक विस्तार और करदाताओं की संख्या में वृद्धि इस सफलता के प्रमुख कारण हैं।
आर्थिक जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई पारदर्शी वित्तीय नीतियों और बेहतर कर प्रबंधन का भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्य सरकार ने एक ओर बड़े करदाताओं और नए कारोबारियों की निगरानी मजबूत की है, वहीं दूसरी ओर छोटे व्यापारियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाया है।
वाणिज्य कर विभाग की रणनीति भी इस सफलता के पीछे अहम मानी जा रही है। विभाग कर आधार बढ़ाने, कर चोरी पर नियंत्रण रखने और डिजिटल माध्यमों से राजस्व संग्रह को अधिक पारदर्शी बनाने पर लगातार काम कर रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि उत्तर प्रदेश अब शुद्ध जीएसटी संग्रह के मामले में देश में दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है।
राजस्व संग्रह में यह वृद्धि केवल सरकारी खजाने को मजबूत नहीं करती, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक सेहत, बढ़ती उपभोक्ता मांग और व्यापारिक गतिविधियों में आई तेजी का भी संकेत देती है। ऐसे समय में जब कई राज्यों को कर संग्रह में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उत्तर प्रदेश का यह प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।