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ISS में हवा रिसाव से मचा हड़कंप, NASA ने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसक्राफ्ट में शिफ्ट किया; इमरजेंसी वापसी की भी तैयारी

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अंतरिक्ष में मौजूद मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक प्रयोगशाला, International Space Station (ISS), एक बार फिर सुरक्षा चिंताओं के कारण चर्चा में आ गई है। स्पेस स्टेशन के रूसी हिस्से में हवा के रिसाव की रफ्तार अचानक बढ़ने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने तत्काल इमरजेंसी अलर्ट जारी करते हुए अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरत पड़ने पर तत्काल निकासी के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।

स्थिति इतनी गंभीर मानी गई कि कई अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन से जुड़े स्पेसक्राफ्ट में जाकर स्पेससूट पहनने के निर्देश दिए गए। हालांकि लगभग दो घंटे तक चली जांच और निगरानी के बाद हालात नियंत्रण में पाए गए, जिसके बाद अलर्ट वापस ले लिया गया। ISS के 27 वर्षों के इतिहास में इस तरह का सुरक्षा अलर्ट बेहद दुर्लभ माना जाता है।

जानकारी के अनुसार, स्पेस स्टेशन के रूसी मॉड्यूल ‘ज्वेज्दा’ में पिछले कई महीनों से मामूली एयर लीक की समस्या बनी हुई थी। लेकिन शुक्रवार को हवा के रिसाव की रफ्तार अचानक दोगुनी हो गई। पहले जहां प्रतिदिन लगभग एक पाउंड हवा का नुकसान हो रहा था, वहीं यह बढ़कर दो पाउंड प्रतिदिन तक पहुंच गया। इसके बाद NASA के वैज्ञानिकों ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।

स्पेस स्टेशन पर वर्तमान में दो अलग-अलग मिशनों के कुल सात अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं। इनमें NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी के सदस्य शामिल हैं। अलर्ट जारी होते ही NASA के क्रू सदस्यों को स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल में जाने और संभावित निकासी के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया।

NASA की प्रवक्ता बेथानी स्टीवंस के अनुसार, मिशन कंट्रोल से आदेश मिलने के बाद यात्रियों को स्पेससूट पहनने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे ताकि यदि रिसाव बढ़ता है तो उन्हें तुरंत पृथ्वी पर वापस भेजा जा सके।

पूरे घटनाक्रम का केंद्र रूसी मॉड्यूल ज्वेज्दा रहा, जहां से हवा रिसने की आशंका जताई गई। इस मॉड्यूल को लेकर पिछले कई महीनों से Roscosmos और NASA के वैज्ञानिकों के बीच तकनीकी चर्चाएं चल रही थीं। दोनों एजेंसियां रिसाव के वास्तविक कारणों और स्थायी समाधान पर काम कर रही हैं।

घटना के दौरान एक दिलचस्प और विवादास्पद स्थिति भी सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूसी अंतरिक्ष यात्री सर्गेई कुद-स्वेरचकोव और सर्गेई मिकायेव संभावित दरार की तलाश के लिए आरी जैसे उपकरण का उपयोग कर रहे थे। NASA ने इस तरीके पर आपत्ति जताई और इसे जोखिमपूर्ण बताया। इसी मतभेद के बीच अमेरिकी एजेंसी ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने का आदेश दिया।

हालांकि राहत की बात यह रही कि विस्तृत जांच के बाद रिसाव की स्थिति नियंत्रण में पाई गई और दो घंटे बाद सभी यात्रियों को वापस सामान्य कार्यों में लौटने की अनुमति दे दी गई। ISS को खाली कराने जैसी नौबत नहीं आई।

ISS के इतिहास में कई बार अंतरिक्ष मलबे और तकनीकी खतरों के कारण ‘सेफ हेवन’ अलर्ट जारी किए गए हैं, लेकिन पिछले 27 वर्षों में स्टेशन को कभी भी पूरी तरह खाली नहीं करना पड़ा है। इस बार भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सतर्कता के चलते संभावित खतरे को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्कर लगाने वाली एक विशाल अंतरिक्ष प्रयोगशाला है। यहां वैज्ञानिक माइक्रोग्रैविटी में विभिन्न प्रयोग करते हैं। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। नवंबर 1998 में इसकी शुरुआत हुई थी और इसे दुनिया की पांच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर विकसित किया है।

फिलहाल ISS सुरक्षित है, लेकिन यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि अंतरिक्ष में जीवन और वैज्ञानिक मिशनों को बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम है।

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