पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विधिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित प्रसिद्ध और पौराणिक ‘सुरहा ताल’ को दुनिया के प्रतिष्ठित रामसर स्थल का दर्जा प्रदान किया गया है। सुरहा ताल आधिकारिक रूप से भारत का 100वां रामसर स्थल बन गया है। इस वैश्विक उपलब्धि के साथ ही उत्तर प्रदेश में अब कुल अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक है।
प्रवासी पक्षियों का वैश्विक स्वर्ग है सुरहा ताल, प्राकृतिक और भौगोलिक रूप से बेहद समृद्ध है क्षेत्र
बलिया मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित सुरहा ताल लगभग 3432 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यह आर्द्रभूमि प्राकृतिक रूप से गंगा और सरयू नदी के कछार से निर्मित एक बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है। सर्दियों के मौसम में साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों किलोमीटर दूर के दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के लिए यह ताल एक सुरक्षित और पसंदीदा विधिक बसेरा रहा है।
यहां पक्षियों की 150 से अधिक और मछलियों की दर्जनों स्थानीय प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसके कारण इस पूरे परिसर को पहले ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पक्षी विहार घोषित किया जा चुका था।
अंतरराष्ट्रीय दर्जे से पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई उड़ान, स्थानीय रोजगार के खुलेंगे विधिक रास्ते
सुरहा ताल को वैश्विक रामसर सूची में शामिल किए जाने के बाद अब इसके विधिक संरक्षण और विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस दर्जे के मिलने के बाद आर्द्रभूमि के मुख्य जलग्रहण क्षेत्र में होने वाले किसी भी प्रकार के अवैध मानवीय हस्तक्षेप, अतिक्रमण और प्रदूषण पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
इसके साथ ही, इस क्षेत्र को एक बड़े ‘इको-टूरिज्म’ हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे वैश्विक पक्षी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों की आमद बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए विधिक अवसर पैदा होंगे।
देश ने छुआ रामसर साइट्स का ऐतिहासिक शतक
भारत के इस ऐतिहासिक ‘रामसर शतक’ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य के बेहतर सुशासन और सतत पर्यावरणीय विधिक प्रयासों का परिणाम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश द्वारा अपनी झीलों और आर्द्रभूमियों के जीर्णोद्धार के लिए चलाई जा रही विशेष नीतियों के कारण ही राज्य आज देश में पर्यावरण संरक्षण का रोल मॉडल बनकर उभरा है।
बलिया जिला प्रशासन ने सुरहा ताल के आसपास के क्षेत्रों के सतत विकास, बोटिंग प्रबंधन, और पक्षी अवलोकन टावरों के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक और कड़ा मास्टर प्लान तैयार करने के विधिक निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर की संप्रभुता और सुंदरता को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जा सके।