अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में एक दिन में 3,470 रुपये की कमी आई है, जबकि चांदी की कीमत में 15,748 रुपये प्रति किलोग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
ताजा गिरावट के बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,50,768 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,41,160 रुपये रह गई है। पिछले कुछ दिनों से दोनों कीमती धातुओं में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन हालिया गिरावट ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
विशेष रूप से चांदी में पिछले आठ दिनों के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली है। 31 मई को चांदी का भाव 2,63,350 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर 2,41,160 रुपये पर आ गया है। यानी महज आठ दिनों में चांदी लगभग 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है।
अगर वर्ष 2026 की शुरुआत से तुलना की जाए तो सोना और चांदी दोनों अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। 29 जनवरी 2026 को सोना 1,76,121 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। वर्तमान कीमतों के मुकाबले तब से अब तक सोना करीब 25 हजार रुपये सस्ता हो चुका है।
चांदी में गिरावट और भी ज्यादा देखने को मिली है। 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 3,85,933 रुपये प्रति किलोग्राम का ऑलटाइम हाई बनाया था। मौजूदा कीमतों के अनुसार तब से अब तक चांदी में लगभग 1.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यह गिरावट निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं से हटकर नकदी की ओर बढ़ रहा है। आमतौर पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी बढ़ाते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है।
विश्लेषकों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक अपने निवेश को अधिक सुरक्षित और लिक्विड रखना चाहते हैं। ऐसे में कई बड़े निवेशकों ने सोना और चांदी बेचकर नकदी जुटाना शुरू कर दिया है। अनिश्चित माहौल में कैश को प्राथमिकता देने की इस रणनीति का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
इसके अलावा जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने मुनाफावसूली भी शुरू की। ऊंचे स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों ने कीमतों में तेजी का फायदा उठाकर अपनी होल्डिंग्स बेचीं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों से जुड़े फैसले और भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
जो लोग सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मौजूदा गिरावट एक अवसर भी साबित हो सकती है। हालांकि निवेश से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी माना जा रहा है।